
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की विशेष पीठ सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में अधिनियम के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
मुख्य बिंदु:
- चुनौती के प्रावधान: याचिकाओं में मुख्य रूप से वक्फ कानून की धारा 3(r), 3(c), और 14 की वैधता को चुनौती दी गई है।
- अंतरिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कानून के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिनमें वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए कम से कम पांच साल तक इस्लाम का अनुयायी होने की शर्त वाला प्रावधान प्रमुख है। कोर्ट ने कहा कि जब तक उचित नियम नहीं बन जाते, यह शर्त लागू नहीं होगी।
- केंद्र का रुख: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि उसे ‘वक्फ बाई यूजर’ के नाम पर वक्फ घोषित की गई सरकारी संपत्तियों का वापस कब्जा पाने का कानूनी अधिकार है। सरकार का कहना है कि कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर अधिकार का दावा नहीं कर सकता।
- मामले का महत्व: यह सुनवाई वक्फ संपत्तियों के सदुपयोग, पंजीकरण, और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दूरगामी प्रभाव डालेगी, साथ ही संपत्तियों की परिभाषा और वक्फ बोर्डों में सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित प्रावधानों पर भी फैसला सुनाया जाएगा।
यह मामला भारत के कानूनी और सामाजिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि यह कानून के समक्ष धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है।



