Uncategorized

गाजियाबाद में 22 स्थानों पर विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित

सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता का दिया संदेश
कविनगर रामलीला मैदान में सर्व हिन्दू समाज द्वारा भव्य सम्मेलन का हजुआ आयोजन
मनस्वी वाणी, संवाददाता

गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष के अंतर्गत जनपद के 19 स्थानों पर विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए गए। इसी क्रम में कविनगर रामलीला मैदान में सर्व हिन्दू समाज द्वारा भव्य सम्मेलन हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में नागरिकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के आयोजन में हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल, सचिव डॉ. अतुल जैन एवं उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। संत स्वामी दीपांकर ने कहा कि हिन्दुओं को जातिगत भेदभाव छोड़कर एकजुट रहना चाहिए और सनातन संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की मानसिकता को त्याग कर संगठन की शक्ति को मजबूत करना होगा।

पवन सिन्हा ने भारत को विश्वगुरु बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि देश में वीरता की कमी नहीं, बल्कि संगठित प्रयासों की आवश्यकता है। जीवन ऋषि महाराज ने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा संकट आंतरिक उदासीनता है और संस्कारों को समाज के आचरण में उतारना आवश्यक है। अरविंद ओझा एवं नवनीत प्रिय दास ने भी हिंदुत्व, सनातन धर्म, संस्कार और राष्ट्र प्रेम पर विचार रखे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पदम ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रेरक संबोधन दिया।
सम्मेलन में देशभक्ति एवं धार्मिक भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिनमें समूह गान, शिव तांडव तथा नृत्य शामिल रहे। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि कमल आग्नेय एवं कवयित्री अंजू जैन ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, ऋषिकेश जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर संतोषानंद महाराज, आरएसएस गाजियाबाद विभाग के बौद्धिक शिक्षण प्रमुख चंद्रभानु सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में कविनगर के नागरिकों व आयोजन समिति के पदाधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button