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चैतन्य महाप्रभु के अनन्य भक्त के रूप में आया हूं’-अमित शाह,

आज सनातन धर्म का संदेश पूरी दुनिया में पहुंच रहा

कोलकाता)। पश्चिम बंगाल के पवित्र मायापुर धाम में श्रील भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद की 152वीं जयंती समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सहभागिता करते हुए कहा कि वह यहां चैतन्य महाप्रभु के अनन्य भक्त के रूप में उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मायापुर की पावन भूमि पर आकर चेतना जागृत हुई है और यह उनके लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण है।

कार्यक्रम में इस्कॉन नामहट्टा के अध्यक्ष पूज्य गौरांग प्रेम स्वामी जी महाराज, गौड़ीय वैष्णव संघ के अध्यक्ष पूज्य भक्ति वेदांत जनार्दन स्वामी जी महाराज, सारस्वत गौड़ीय वैष्णव संघ के सचिव पूज्य भक्ति वैभव नारायण स्वामी महाराज सहित अनेक संत उपस्थित रहे। शाह के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य भी मौजूद थे।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए शाह ने बताया कि आज का दिन और स्थान दोनों ही पवित्र हैं। एक ओर श्री चैतन्य महाप्रभु की लीला भूमि मायापुर है, वहीं दूसरी ओर भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद की 152वीं जयंती का अवसर है, जो मणिकांचन योग जैसा शुभ संयोग है। उन्होंने चैतन्य महाप्रभु, प्रभु नित्यानंद, अद्वैताचार्य, गदाधर और श्रीवास को नमन करते हुए अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि श्रील भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद और श्रील भक्ति वेदांत प्रभुपाद ने चैतन्य महाप्रभु द्वारा आरंभ किए गए भक्ति आंदोलन को न केवल आगे बढ़ाया बल्कि आधुनिकता से जोड़कर विश्वभर में आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। शाह ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भक्ति सिद्धांत प्रभुपाद ने अपने जीवनकाल में एक अरब बार श्रीकृष्ण नाम जप का संकल्प लेकर उसे पूर्ण किया, जो विश्व के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि भक्ति सिद्धांत प्रभुपाद ने धर्म को रूढ़ियों से बाहर निकालने का साहस दिखाया और आधुनिकता को धर्म का साथी बताया। प्रिंटिंग प्रेस को ‘बृहत मृदंग’ नाम देकर उन्होंने यह स्थापित किया कि पुस्तकें सात सागर पार जाकर भी भक्ति का प्रचार कर सकती हैं। उन्होंने जातिगत बंधनों को तोड़ते हुए जन्म से ब्राह्मण न होने वालों को भी यज्ञोपवीत देकर उन्हें ब्राह्मण बनने का अधिकार प्रदान किया और ‘युक्त वैराग्य’ की नई व्याख्या प्रस्तुत की।

शाह ने कहा कि सच्चा गुरु वही है जो स्वयं को सेवक मानता है और शिष्य को ऊंचा उठाता है। उन्होंने भक्ति सिद्धांत प्रभुपाद को सच्चे गुरु के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार किए गए शिष्य भक्ति वेदांत प्रभुपाद ने इस्कॉन आंदोलन को वैश्विक स्तर पर विस्तार दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज सनातन धर्म का संदेश पूरी दुनिया में पहुंच रहा है।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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