उत्तर प्रदेशमेरठस्वास्थ्य

लिवर ट्रांसप्लांट में नई तकनीक से मरीजों को मिल रही नई जिंदगी

लिवर ट्रांसप्लांट में उन्नत सर्जिकल तकनीकों का बड़ा योगदान

मेरठ: लिवर ट्रांसप्लांट लंबे समय से आधुनिक चिकित्सा की सबसे जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। हालांकि चिकित्सा विज्ञान और तकनीक में हुई प्रगति के कारण अब इसके परिणाम पहले से अधिक बेहतर हो गए हैं। इससे एंड-स्टेज लिवर डिजीज, एक्यूट लिवर फेल्योर और कुछ प्रकार के लिवर कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद पैदा हुई है। आधुनिक तकनीकों की मदद से सर्जरी अधिक सुरक्षित और प्रभावी होती जा रही है।

लिवर ट्रांसप्लांट में उन्नत सर्जिकल तकनीकों का बड़ा योगदान है। 3D रिकंस्ट्रक्शन और ऑपरेशन के दौरान उपयोग होने वाले नेविगेशन सिस्टम डॉक्टरों को लिवर की संरचना और रक्त वाहिकाओं का सटीक नक्शा देखने में मदद करते हैं। इससे सर्जरी के दौरान जोखिम कम होता है, ऑपरेशन का समय घटता है और सफलता की संभावना बढ़ती है। इसके अलावा मिनिमली इनवेसिव और रोबोट-असिस्टेड तकनीकें, खासकर लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में, प्रक्रिया को और सुरक्षित बना रही हैं। इन तकनीकों से चीरे छोटे लगते हैं, दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो पाते हैं।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के एचपीबी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अजिताभ श्रीवास्तव के अनुसार पहले लिवर ट्रांसप्लांट मुख्य रूप से मृत दाताओं पर निर्भर था, लेकिन अब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट एक सफल और व्यापक रूप से स्वीकार की जाने वाली प्रक्रिया बन चुकी है। लिवर की खासियत यह है कि इसमें खुद को पुनः विकसित करने की क्षमता होती है, इसलिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का हिस्सा मरीज को प्रत्यारोपित किया जा सकता है और समय के साथ दोनों का लिवर सामान्य आकार में विकसित हो जाता है। इसके अलावा स्प्लिट लिवर ट्रांसप्लांट तकनीक से एक मृत दाता का लिवर दो मरीजों की जान बचा सकता है।

उन्होंने बताया कि ऑर्गन प्रिजर्वेशन तकनीक में भी बड़ा सुधार हुआ है। मशीन परफ्यूजन तकनीक के माध्यम से डोनर के लिवर को शरीर से बाहर भी बेहतर स्थिति में सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे ट्रांसप्लांट से पहले अंग की कार्यक्षमता का सही आकलन संभव हो पाता है और परिणाम बेहतर होते हैं। वहीं नई पीढ़ी की इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं और बेहतर पोस्ट-ट्रांसप्लांट देखभाल से अंग अस्वीकार होने का खतरा कम हुआ है और मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार आया है।

विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में रीजेनरेटिव मेडिसिन, बायोइंजीनियर्ड लिवर टिशू और आर्टिफिशियल लिवर सपोर्ट सिस्टम जैसी तकनीकें इस क्षेत्र में और नई संभावनाएं खोल सकती हैं। लगातार हो रहे इन नवाचारों के कारण लिवर ट्रांसप्लांट अब सिर्फ जीवन बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मरीजों को नया जीवन देने का माध्यम बन रहा है। 

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button