
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की हालिया सऊदी अरब यात्रा के दौरान, सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने पाकिस्तान के लिए वित्तीय और रणनीतिक समर्थन का “खजाना खोल दिया”। यह कदम पाकिस्तान की गहरी आर्थिक चुनौतियों के बीच आया है।
सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता किया, जिसे दोनों देशों के बीच सहयोग में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
- इस समझौते के तहत, सऊदी अरब पाकिस्तान में 10 अरब डॉलर का बड़ा निवेश करने की योजना बना रहा है, जो पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदान साबित हो सकता है।
- इसके बदले में, पाकिस्तान सऊदी अरब में लगभग 25,000 सैनिकों की तैनाती करेगा, जिसमें पाकिस्तानी सेना की चार ब्रिगेड, दो एयर फ़ोर्स स्क्वाड्रन और दो नौसेना फ़्लीट शामिल होंगी।
- यह रक्षा समझौता “एक पर हमला, दोनों पर हमला” के सिद्धांत को शामिल करता है, जो नाटो (NATO) जैसे सैन्य गठबंधनों के समान है, जिससे सऊदी अरब को पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का परोक्ष संरक्षण मिलने की अटकलें हैं।
- सऊदी अरब ने पहले भी पाकिस्तान को $3 बिलियन से अधिक का ऋण और वित्तीय सहायता देकर उसे डिफॉल्टर होने से बचाया है, जो दोनों देशों के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को दर्शाता है।
- इस डील के तहत सऊदी अरब कूटनीतिक माध्यमों से भारत और तालिबान के साथ पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने में भी मदद कर सकता है।
- विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब ईरान और इज़राइल जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए यह रणनीतिक साझेदारी कर रहा है।
यह यात्रा और समझौता पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है और उसकी गिरती अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का एक प्रयास है।



