गाजियाबाद

घने कोहरे का विमानन सेवाओं पर प्रहार: यात्री परेशान और उड़ानों की रफ्तार थमी

उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में छाई घने कोहरे की चादर ने हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे प्रमुख महानगरों की ओर जाने वाली उड़ानों में भारी देरी देखी गई। कम दृश्यता (Low Visibility) के कारण हवाई अड्डों पर रनवे संचालन में बाधा आई, जिससे दर्जनों उड़ानों को अपने निर्धारित समय से कई घंटे पीछे धकेलना पड़ा। सुबह के समय दृश्यता का स्तर काफी कम रहने की वजह से विमानों को टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए एटीसी से हरी झंडी मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस स्थिति ने न केवल परिचालन व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि विमानन कंपनियों के लिए भी उड़ानों के समय को पुनर्गठित करना एक कठिन कार्य बना दिया है, जिससे पूरे देश का हवाई नेटवर्क प्रभावित हो रहा है।

उड़ानों में इस अनपेक्षित देरी के कारण हवाई अड्डों पर यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बेंगलुरु और मुंबई जाने वाले यात्रियों में से कई कामकाजी पेशेवर और पर्यटक थे, जिनके महत्वपूर्ण कार्यक्रम इस विलंब के कारण प्रभावित हुए। हवाई अड्डों के टर्मिनलों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई, जहाँ कई लोग घंटों तक उड़ानों की जानकारी का इंतजार करते रहे। हालांकि विमानन कंपनियों ने यात्रियों को जलपान और नियमित अपडेट देने की कोशिश की, लेकिन उड़ानों के बार-बार री-शेड्यूल होने से यात्रियों में नाराजगी और थकावट साफ देखी गई। विशेष रूप से बुजुर्गों और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण रही, क्योंकि कोहरे की अनिश्चितता ने उनकी यात्रा योजनाओं को अनिश्चित बना दिया।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक कोहरे का यह सितम जारी रह सकता है, जिससे विमानन सेवाओं पर दबाव और बढ़ेगा। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइंस की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए उड़ान की स्थिति की जांच अवश्य कर लें। कोहरे के प्रभाव को कम करने के लिए हवाई अड्डों पर उन्नत कैट-III (CAT-III) लैंडिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन अत्यधिक शून्य दृश्यता की स्थिति में सुरक्षा कारणों से परिचालन रोकना ही एकमात्र विकल्प बचता है। यह स्थिति हमें याद दिलाती है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद प्रकृति की चुनौतियां परिवहन व्यवस्था को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं। प्रशासन और एयरलाइंस अब इस प्रयास में हैं कि स्थिति सुधरते ही उड़ानों के अंतराल को कम कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुँचाया जा सके।

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