
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से पश्चिम बंगाल और असम के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहाँ वे राष्ट्र को हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरे की शुरुआत पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से हुई, जहाँ प्रधानमंत्री ने लगभग 3,200 करोड़ रुपये की लागत वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसमें प्रमुख रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) के 66.7 किलोमीटर लंबे बाराजागुली-कृष्णानगर खंड का फोर-लेनिंग कार्य शामिल है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ये परियोजनाएं न केवल क्षेत्र के सड़क संपर्क को बेहतर करेंगी, बल्कि कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा के समय में लगभग 2 घंटे की कमी लाकर व्यापार और पर्यटन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेंगी।
पश्चिम बंगाल के बाद प्रधानमंत्री असम के गुवाहाटी पहुंचे, जहाँ उन्होंने लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारत के पहले ‘प्रकृति-थीम’ आधारित एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत से बना यह भव्य टर्मिनल ‘बैंबू ऑर्किड्स’ (बांस के बाग) की थीम पर आधारित है, जो असम की समृद्ध जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। यह नया टर्मिनल प्रति वर्ष 1.3 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है, जो पूर्वोत्तर भारत के लिए वैश्विक द्वार के रूप में कार्य करेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने हवाई अड्डे के पास भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई की 80 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का अनावरण कर राज्य के महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
दौरे के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री डिब्रूगढ़ के नामरूप में असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड की महत्वाकांक्षी अमोनिया-यूरिया परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। इस उर्वरक परियोजना से न केवल असम बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व के किसानों को समय पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूती मिलेगी। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री गुवाहाटी में असम आंदोलन के शहीदों को ‘शहीद स्मारक क्षेत्र’ में श्रद्धांजलि भी देंगे। कुल मिलाकर, यह दो दिवसीय दौरा पश्चिम बंगाल और असम के बीच सामाजिक-आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के विकास इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



