
गाजियाबाद और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के प्रकोप ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को बढ़ा दिया है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों की ओपीडी में पिछले एक सप्ताह के भीतर मरीजों की संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। विशेष रूप से जोड़ों के दर्द (Arthritis) और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या से जूझ रहे बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है। डॉक्टरों का कहना है कि तापमान गिरने से नसों में संकुचन होता है और जोड़ों का लुब्रिकेशन कम हो जाता है, जिससे पुराने दर्द दोबारा उभर आते हैं। इसके अलावा, सुबह और शाम के समय चलने वाली बर्फीली हवाओं ने गठिया के मरीजों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
ठंड के साथ-साथ इन दिनों पेट की बीमारियों (Gastrointestinal issues) के मरीजों में भी अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। दूषित पानी और ठंड के कारण होने वाले वायरल संक्रमण से लोग दस्त, उल्टी और पेट में ऐंठन की शिकायत लेकर अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम तापमान में बैक्टीरिया और वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं, और लोग अक्सर पानी कम पीते हैं जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है। गाजियाबाद के वरिष्ठ फिजिशियन ने चेतावनी दी है कि इस मौसम में बाहर के खाने और बासी भोजन से बचना चाहिए, क्योंकि यह ‘फूड पॉइजनिंग’ और गैस्ट्रोएंटेराइटिस का मुख्य कारण बन रहा है।
बढ़ते रोगों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवायजरी जारी कर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। जोड़ों के दर्द से बचने के लिए पर्याप्त गरम कपड़े पहनने और नियमित रूप से हल्के व्यायाम करने का सुझाव दिया गया है। पेट की समस्याओं से सुरक्षा के लिए हमेशा ताजा और गरम भोजन करने तथा पानी को उबालकर पीने पर जोर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी को लगातार दर्द या पेट में दिक्कत महसूस हो, तो वे घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें। ठंड का यह मौसम जनवरी के अंत तक जारी रहने की संभावना है, इसलिए लापरवाही बरतने से बड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।



