
नए साल 2026 के स्वागत की तैयारियों के बीच ऑनलाइन फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी सेवाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। Swiggy, Zomato, Zepto और Blinkit जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के हजारों डिलीवरी पार्टनर्स ने 31 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। डिलीवरी पार्टनर्स का यह विरोध मुख्य रूप से उनके कम होते ‘पे-आउट’ (Pay-out) ढांचे, लंबे काम के घंटे और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच मिलने वाले कम इंसेंटिव के खिलाफ है। चूंकि साल का आखिरी दिन इन कंपनियों के लिए सबसे व्यस्त समय होता है, ऐसे में यह हड़ताल नए साल की पार्टियों और घरेलू ऑर्डर के वितरण को पूरी तरह ठप कर सकती है, जिससे ग्राहकों और कंपनियों दोनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
डिलीवरी गग-वर्कर्स (Gig-workers) के संघों का आरोप है कि कंपनियां त्योहारों के सीजन में भारी मुनाफा कमाती हैं, लेकिन जमीन पर काम करने वाले राइडर्स की सुरक्षा और बीमा जैसी बुनियादी मांगों की अनदेखी की जाती है। हड़ताल का आह्वान करने वाले संगठनों ने मांग की है कि प्रति ऑर्डर न्यूनतम गारंटी राशि बढ़ाई जाए और देर रात तक काम करने वाले राइडर्स के लिए विशेष सुरक्षा भत्ता सुनिश्चित हो। यदि यह हड़ताल प्रभावी होती है, तो दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। कई शहरों के स्थानीय यूनियनों ने पहले ही ‘ऐप ऑफ’ (App-off) अभियान शुरू करने का संकेत दे दिया है, जिसका अर्थ है कि उस दिन ऐप पर कोई भी डिलीवरी पार्टनर लॉग-इन नहीं करेगा।
दूसरी ओर, ई-कॉमर्स कंपनियां इस संकट को टालने के लिए पर्दे के पीछे बातचीत कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने राइडर्स को लुभाने के लिए 31 दिसंबर की रात के लिए ‘सर्ज बोनस’ (Surge Bonus) देने की घोषणा की है, लेकिन यूनियन नेता इसे केवल एक अस्थायी समाधान बता रहे हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे 31 दिसंबर की शाम के लिए अपनी जरूरी चीजों का स्टॉक पहले से कर लें या वैकल्पिक व्यवस्था रखें। यह विवाद एक बार फिर भारत में गग-इकोनॉमी (Gig-Economy) में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के अधिकारों और उनकी कार्य स्थितियों पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले घंटों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन या कंपनियां इस हड़ताल को रोकने में सफल हो पाती हैं या नहीं।



