
ईरान में गहराते आर्थिक संकट और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब एक बेहद हिंसक और गंभीर रूप ले लिया है। ताजा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, पिछले नौ दिनों से जारी इन प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 35 तक पहुँच गई है। इनमें कम से कम चार बच्चे और ईरान के सुरक्षा बलों के दो सदस्य भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ते टकराव ने देश के 27 प्रांतों को अपनी चपेट में ले लिया है। मानवाधिकार संस्था ‘हरना’ (HRANA) के मुताबिक, अब तक 1,200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक कार्यकर्ता शामिल हैं।
इस जनाक्रोश की मुख्य जड़ ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था, मुद्रा रियाल की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट और 52% से अधिक की मुद्रास्फीति (Inflation) है। प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाज़ार से व्यापारियों की हड़ताल के रूप में हुई थी, लेकिन अब यह “तानाशाही के खात्मे” और राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल गई है। सुरक्षा बलों पर आरोप लग रहे हैं कि वे भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सीधे गोलियां और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेष रूप से लोरेस्तान और करमानशाह जैसे प्रांतों में स्थिति सबसे अधिक तनावपूर्ण बनी हुई है, जहाँ सड़कों पर आगजनी और भीषण झड़पों की खबरें आ रही हैं।
वैश्विक मंच पर इस संकट ने भारी हलचल मचा दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने ईरान सरकार से संयम बरतने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के अधिकार का सम्मान करने की अपील की है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “लॉक्ड एंड लोडेड” वाली चेतावनी के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को ‘दंगाई’ करार देते हुए उनसे सख्ती से निपटने का आदेश दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने तत्काल आर्थिक सुधारों और जन-संवाद की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो यह विद्रोह 2022 के ‘महसा अमीनी’ आंदोलन से भी अधिक व्यापक और विनाशकारी साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरे ईरान में इंटरनेट सेवाओं पर आंशिक पाबंदी के कारण जमीनी हकीकत की खबरें छन-छन कर बाहर आ रही हैं।



