गाजियाबाद

भक्तमाल जयंती उत्सव: इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज के सान्निध्य में प्रारंभ हुई भक्तमाल कथा

गाजियाबाद। शहर के हिंदी भवन में संस्कार उपवन परिवार के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय “भक्तमाल जयंती उत्सव” का शुभारंभ भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। होली के पावन अवसर पर कार्यक्रम के प्रथम दिन वृंदावन से पधारे परम पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज का मंगलमय आगमन हुआ। उनके आगमन पर भक्तों ने पुष्प अर्पित कर स्वागत किया तथा महाराज जी ने पटका पहनाकर सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।

नवनीत प्रिय दास जी के मार्गदर्शन में आयोजन

कार्यक्रम की शुरुआत राधावल्लभ संकीर्तन मंडल के सदस्यों द्वारा संकीर्तन से की गई। इसके बाद लुभानी बृजवासी ने अपने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। तत्पश्चात संस्कार उपवन के संस्थापक गुरुजी नवनीत प्रिय दास जी महाराज द्वारा भक्तमाल कथा का भावपूर्ण गायन किया गया। उन्होंने वर्तमान समाज में संस्कारों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संतों की वाणी का श्रवण ही हमारे जीवन में अच्छे संस्कारों का संचार करता है।

इंद्रेश उपाध्याय जी ने  वृंदावन का अनुभव कराया ।

वृंदावन से पधारे इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्तमाल की कथा अपने ठाकुर जी को सुनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने होली के रसिया और संतों के पदों का गायन कर ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना दिया कि श्रद्धालुओं को गाजियाबाद में ही वृंदावन की अनुभूति होने लगी।इस अवसर पर “तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले, मेरी नैया है अब तेरे हवाले, जय प्रभु जगन्नाथ” भजन पर श्रद्धालु झूम उठे, वहीं होली के रसिया पर सभी भक्त आनंदपूर्वक नृत्य करने लगे।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक रामअवतार जिंदल और अनिल गर्ग ने संतों का पटका व माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान प्रदीप कुमार, शरद अग्रवाल, अनुराग गोयल, विनीत माहेश्वरी और रामनिवास बंसल रहे।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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