
दिल्ली और आसपास के एनसीआर शहरों (गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 450 के पार पहुँचते ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP-4 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का चौथा चरण) लागू करने का आदेश दे दिया है। इस सख्त प्रोटोकॉल के तहत, प्रशासन ने स्कूलों की भौतिक कक्षाओं (Physical Classes) को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। आदेश के अनुसार, कक्षा 1 से 9वीं तक और 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल बंद रहेंगे और उनकी पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएगी। केवल 10वीं और 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के मद्देनजर छूट दी गई है, हालांकि उनके लिए भी सख्त स्वास्थ्य दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
GRAP-4 लागू होने का सीधा अर्थ है कि क्षेत्र में ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ जैसी स्थिति है। स्कूलों के बंद होने के साथ-साथ दिल्ली में डीजल से चलने वाले मध्यम और भारी माल वाहनों (आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर) के प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी निजी और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी छात्र को स्कूल न बुलाया जाए, ताकि उन्हें जहरीली हवा के संपर्क में आने से बचाया जा सके। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, और 400 से अधिक AQI वाली हवा में सांस लेना उनके लिए लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
अभिभावकों और शिक्षकों के बीच इस निर्णय को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है; जहाँ स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं बार-बार स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक विकास पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई जा रही है। प्रदूषण का यह स्तर मुख्य रूप से हवा की धीमी गति, गिरते तापमान और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के कारण बना हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक AQI का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी से नीचे नहीं आता, तब तक स्कूलों पर यह पाबंदी जारी रहेगी। फिलहाल, दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों छात्र एक बार फिर अपने घरों की चारदीवारी के भीतर से डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से शिक्षा लेने को मजबूर हैं।



