गाजियाबाद

प्राचीन हनुमान मंदिर के पास चिकन की दुकानें हटाने की मांग

: चिकन की दुकान के सामने खड़े वाहन मेरठ रोड पर लगा रहता है जाम, आखिर कौन जिम्मेदार

मनस्वी वाणी संवाददाता

मुरादनगर। दिल्ली-मेरठ रोड स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के समीप संचालित हो रही चिकन और बिरयानी की दुकानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गौ रक्षा दल के जिला अध्यक्ष गुलशन राजपूत ने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को एक शिकायती पत्र भेजकर इन दुकानों को तत्काल प्रभाव से हटवाने की पुरजोर मांग की है। पत्र में कहा गया है कि मंदिर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ‘नाज चिकन पॉइंट’ और ‘अलराजा चिकन बिरयानी’ जैसी दुकानें होने से प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंच रही है। 

साथ ही दुकानों के सामने खड़े वाहनों के कारण हर समय मेरठ रोड पर जाम लगा रहता है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूर्व में पुलिस द्वारा मंदिर के आसपास से मीट की दुकानों को हटवा दिया गया था, लेकिन कथित रूप से पुलिस की मिलीभगत के कारण ये दुकानें दोबारा खुल गई हैं और बदस्तूर जारी हैं। पत्र में दुकानों के पास होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन दुकानों के अंदर और बाहर खड़े वाहनों में शराब परोसी जाती है, जिससे वहां का माहौल दूषित हो रहा है। इसके अलावा, शाम के समय सड़क पर बेतरतीब तरीके से खड़ी होने वाली बाइकों और कारों के कारण दिल्ली-मेरठ रोड पर आए दिन भारी जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।गौ रक्षा दल ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि इन दुकानों पर जुटने वाली भीड़ और असामाजिक तत्वों के कारण वहां से गुजरने वाली महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। पत्र में हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए  थूक लगाकर रोटी बनाने के विवाद का भी जिक्र किया गया है, जिसमें मुरादनगर थाने में मामला भी दर्ज हुआ था। संगठन का कहना है कि यदि प्रशासन ने इन दुकानों पर जल्द कठोर कार्यवाही नहीं की, तो भविष्य में शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ने की पूरी आशंका है। फिलहाल, इस शिकायत के बाद  सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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