हाउस टैक्स वृद्धि को लेकर नगर निगम सदन में हंगामा
पार्षद बिल्लु यादव ने मेयर को सौंपा इस्तीफा

पार्षदों ने एकजुट होकर किया विरोध, पहले टैक्स वृद्धि वापस लेने की उठी मांग
गाजियाबाद। नगर निगम सभागार में आयोजित बोर्ड बैठक उस समय हंगामेदार हो गई जब बैठक शुरू होते ही पार्षदों ने हाउस टैक्स वृद्धि के मुद्दे पर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। मेयर सुनीता दयाल और नगरायुक्त विक्रमादित्य मलिक की मौजूदगी में शुरू हुई बैठक में पार्षदों ने एकजुट होकर नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए हाउस टैक्स को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

बैठक के दौरान सदन का माहौल काफी गरम रहा और कई बार पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। पार्षदों का कहना था कि हाउस टैक्स में की गई वृद्धि से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाउस टैक्स वृद्धि के विरोध को और तेज करते हुए पार्षद बिल्लु यादव ने सदन में ही अपना इस्तीफा मेयर को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि जब जनता पर अनावश्यक टैक्स का बोझ डाला जा रहा है तो ऐसे में पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि वे जनता के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे और हाउस टैक्स वृद्धि के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

वहीं सदन में चर्चा के दौरान पार्षद संजय सिंह ने हाउस टैक्स वृद्धि के पूरे मामले की जिम्मेदारी कुछ पूर्व पार्षदों पर डाल दी। उन्होंने कहा कि हाउस टैक्स वृद्धि का मामला उस समय शुरू हुआ जब कुछ पूर्व पार्षद इस मुद्दे को लेकर न्यायालय चले गए थे, जिसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत यह निर्णय लिया गया। संजय सिंह के इस बयान पर सदन में मौजूद कई पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि वर्तमान समस्या का समाधान निकालना अधिक जरूरी है।
इसी दौरान नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने भी स्पष्ट रूप से कहा कि सबसे पहले हाउस टैक्स वृद्धि के फैसले को वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जब तक टैक्स वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक अन्य किसी भी विषय पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। बैठक के दौरान कई पार्षदों ने यह भी कहा कि नगर निगम को जनता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन इस विषय पर पुनर्विचार करे और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर ऐसा समाधान निकाले जिससे जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

हाउस टैक्स वृद्धि को लेकर नगर निगम की यह बैठक लंबे समय तक चर्चा और विरोध के बीच चलती रही। पार्षदों के कड़े तेवरों को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है तथा नगर निगम प्रशासन पर इस फैसले की समीक्षा का दबाव बढ़ सकता है।



