
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण स्तंभ और अनुभवी सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपने संन्यास की आधिकारिक घोषणा कर दी है। 39 वर्षीय ख्वाजा ने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ होने वाला मौजूदा एशेज सीरीज का पांचवां और अंतिम टेस्ट उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच होगा। यह संयोग ही है कि ख्वाजा ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत भी 2011 में इसी मैदान से की थी और अब वे अपने घरेलू दर्शकों के सामने ‘बैगी ग्रीन’ को अंतिम विदाई देंगे। इस घोषणा के समय उनका परिवार भी उनके साथ मौजूद था, जिससे माहौल काफी भावुक हो गया।
उस्मान ख्वाजा का करियर न केवल रनों के लिए बल्कि बाधाओं को तोड़ने के लिए भी याद किया जाएगा; वे ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले मुस्लिम और पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी बने। अपने 15 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने अब तक 87 टेस्ट मैचों में 43.39 की औसत से 6,206 रन बनाए हैं, जिसमें 16 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं। ख्वाजा ने संन्यास लेते समय अपने संघर्षों और करियर के दौरान झेले गए ‘नस्लीय रूढ़ियों’ (Racial Stereotypes) पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भविष्य के ‘उस्मान ख्वाजा’ के लिए रास्ता आसान बनाना था ताकि उन्हें केवल उनके खेल के आधार पर आंका जाए।
ख्वाजा का हालिया प्रदर्शन और चोटों के साथ संघर्ष (विशेषकर पीठ की समस्या) उनके इस निर्णय का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, वे 2021-23 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की जीत और 2023 के आईसीसी टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर जैसे पुरस्कारों के साथ एक उच्च स्तर पर खेल को छोड़ रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान और टीम के साथियों ने उन्हें एक ‘लीडर’ और ‘रोल मॉडल’ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की है। सिडनी में 4 जनवरी से शुरू होने वाला अंतिम टेस्ट अब न केवल एशेज के समापन का गवाह बनेगा, बल्कि एक शानदार सलामी बल्लेबाज की ऐतिहासिक विदाई का भी केंद्र होगा।



