
- रास्ता भटकी महिला और बच्चों को खाना खिलाकर परिवार को किया फोन
- रामपुर से मुरादाबाद जा रही थी परिवार के साथ महिला
- बस चालक ने गाजियाबाद के डासना पूल में छोड़ा
गाजियाबाद। पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड के द्वारा जहां लगातार पुलिस कर्मचारियों को जनता के साथ बेहतर संवाद और बेहतर तालमेल करने की हिदायत देते हुए नजर आ रहे हैं । वहीं अब पुलिस मानवता और इंसानियत का फर्ज अदा करती हुई भी नजर आ रही है। इसी कड़ी में देखा गया कि रामपुर के पास एक गांव से शादी समारोह से वापस मुरादाबाद (कांठ) आ रही एक महिला और बच्चों को जब बस चालक द्वारा डासना पुल पर छोड़ा गया तो आईएमएस कॉलेज अंडरपास में तैनात ट्रैफिक पुलिस उपनिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल ओमकार और होमगार्ड सरवर ने इंसानियत और मानवता का परिचय देते हुए महिला से उसकी समस्या पूछी और उन्हें पास के एक होटल में खाना खिलाकर परिवार के फोन कर परिवार के सुपुर्द करने का कार्य किया है। हालांकि महिला के साथ उसकी दो नाबालिक बच्ची और दो मासूम बच्चे भी साथ थे। महिला और उसके परिवार ने पुलिस की कार्य प्रणाली से खुश होकर गाजियाबाद पुलिस की जमकर प्रशंसा की है। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि मुरादाबाद के भीखनपुर निवासी मनोज की पत्नी अपनी एक 16 वर्षीय पुत्री, एक 14 वर्षीय पुत्री और एक चार वर्षीय पुत्री के अलावा दो वर्षीय पुत्र के साथ रामपुर के पास के एक गांव से शादी समारोह से वापस अपने घर आ रही थी। इसी बीच किसी कारणवस मुरादाबाद की बस की बजाय दिल्ली की बस में बैठ गयी और बस में नींद आ गई। दिल्ली की बस में बैठ जाने के कारण महिला अपने बच्चों के साथ हताश व परेशान थी। अचानक से बस चालक द्वारा महिला और उसके बच्चों को डासना के पुल पर उतार दिया गया। महिला परेशान व हतास नजर आई। आईएमएस कॉलेज के पास अंडरपास में ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर पुष्पेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल ओंकार सिंह और होमगार्ड सरवर ने महिला से उनकी परेशानी की वजह पूछी महिला ने अपनी समस्या बताई । हालांकि रात्रि होने के चलते करीब 7:00 बजे बच्चे भूखे थे। जिन्हें पुलिस कर्मचारियों द्वारा पास के होटल पर खाना खिलाया गया और उनसे मोबाइल नंबर लेकर उनके परिवार को फोन किया गया। हालांकि परिजनों द्वारा करीब 9:30 बजे डासना पहुंच कर पुलिस की जमकर प्रशंसा करते हुए कार्य प्रणाली की प्रशंसा की है। पुलिस ने परिजनों के महिला और बच्चों को सुपुर्द कर पुलिस कार्यप्रणाली को बेहतर साबित करने का कार्य किया यानी की इंसानियत और मानवता का फर्ज अदा किया है।



