
क्या नियमों से होगा समझौता या पैनल में आएंगे नए चेहरे?
गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी की प्रस्तावित महानगर कमेटी के गठन को लेकर इन दिनों संगठन के भीतर मंथन तेज हो गया है। महानगर स्तर पर नई कमेटी के गठन से पहले विभिन्न जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा अपने-अपने समर्थकों के नाम संगठन को भेजे जा चुके हैं। इसी बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि कई ऐसे नाम भी पैनल में शामिल किए जा रहे हैं, जो पार्टी की तय आयु सीमा से अधिक हैं।
दरअसल पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की ओर से 16 जनवरी 2026 को आयोजित वर्चुअल बैठक में जिला समिति गठन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके तहत जिला कार्यसमिति में अध्यक्ष सहित कुल 90 पदाधिकारी और सदस्य रखने का प्रावधान किया गया है, जिनमें आठ उपाध्यक्ष, तीन महामंत्री, आठ मंत्री और एक कोषाध्यक्ष शामिल होंगे। साथ ही समिति में महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने का निर्देश दिया गया है।
पार्टी के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला पदाधिकारियों के लिए उम्र सीमा 30 से 50 वर्ष के बीच तय की गई है। हालांकि महिला और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए इस आयु सीमा में छूट दी गई है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या संगठन इन नियमों का कड़ाई से पालन करेगा या फिर अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले नेताओं को भी कमेटी में जगह दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद में कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने समर्थकों के नाम संगठन को भेजे हैं। इनमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो आयु सीमा से अधिक हैं, लेकिन संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। यही वजह है कि कमेटी गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संगठन इस बार कमेटी गठन में सामाजिक समीकरण, सक्रियता, संगठन के प्रति निष्ठा और कार्यक्षमता को प्राथमिकता देगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा महानगर कमेटी में नए और युवा चेहरों को मौका मिलता है या फिर अनुभवी नेताओं को तरजीह दी जाती है।



