
कुएं की प्राचीनता, गहराई, चौड़ाई और निर्माण में लगी ईंटों की होगी जांच; हिंदू संगठनों ने मंदिर होने की जताई आशंका
मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया तो उसके नीचे एक कुआं मिलने से मामला चर्चा में आ गया। कुआं सामने आने के बाद कुछ हिंदू संगठनों की ओर से यहां पूर्व में मंदिर होने की आशंका जताई गई। शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने भी दावा किया कि संबंधित स्थान पर मंदिर था और मामले की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से विस्तृत जांच कराने की मांग की। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुएं की प्राचीनता और ऐतिहासिक स्थिति की जांच के लिए एएसआई को सूचना दी।
इसी क्रम में सोमवार को एएसआई की टीम सिटी मजिस्ट्रेट सहारनपुर की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची और मौके पर मिले कुएं की जांच शुरू की। टीम ने सबसे पहले कुएं की संरचना और निर्माण शैली का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कुएं की गहराई, चौड़ाई और उसकी बनावट के संबंध में जानकारी जुटाई। साथ ही कुएं की दीवारों में लगी ईंटों के आकार, प्रकार और निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री का भी निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान एएसआई की टीम ने कुएं की मिट्टी और उसमें लगी ईंटों के नमूने भी लिए। इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच के बाद कुएं की अनुमानित उम्र और निर्माण काल का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि कुआं कितना पुराना है, इसका निर्माण किस कालखंड में हुआ और इसकी निर्माण तकनीक उस समय की किस शैली से मेल खाती है।
मौके पर कुएं की गहराई का सही आकलन करने के लिए भी प्रयास किए गए। कुएं के अंदर की स्थिति को देखने के लिए सीढ़ी मंगाई गई और अधिकारियों ने सुरक्षित तरीके से नीचे जाकर निरीक्षण करने की तैयारी की। कुएं के भीतर मौजूद संरचना और उसकी दीवारों का भी जायजा लिया जा रहा है। एएसआई टीम ने मौके पर उपलब्ध सभी तथ्यों को दर्ज किया और आवश्यक नमूने एकत्र किए।
मलबा हटाए जाने के दौरान कुआं मिलने के बाद से ही इसको लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ हिंदू संगठनों का कहना है कि कुएं की मौजूदगी इस स्थान के पुराने इतिहास से जुड़ी हो सकती है और यहां पहले मंदिर होने की संभावना की जांच की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने भी इसे मंदिर से जोड़ते हुए एएसआई से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुरातात्विक जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
हालांकि, कुएं के मिलने मात्र से यहां मंदिर होने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने मामले को विशेषज्ञों की जांच के लिए सौंपा है और एएसआई की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार कुएं की उम्र, निर्माण शैली और अन्य तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव होगा।
कलेक्ट्रेट परिसर में एएसआई टीम की जांच के दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया, ताकि पुरातात्विक जांच के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो और कुएं की संरचना को नुकसान न पहुंचे।
एएसआई टीम द्वारा लिए गए मिट्टी और ईंटों के नमूनों की जांच के बाद कुएं की प्राचीनता को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके अलावा कुएं की वास्तविक गहराई, चौड़ाई, निर्माण शैली और इस्तेमाल की गई ईंटों की उम्र का भी अध्ययन किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद तैयार रिपोर्ट प्रशासन को दी जाएगी।
फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर में मिले कुएं को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। हिंदू संगठनों और शिकायतकर्ता की ओर से मंदिर होने की संभावना जताते हुए जांच की मांग की गई है, जबकि प्रशासन ने मामले में किसी भी निष्कर्ष से पहले पुरातात्विक जांच को प्राथमिकता दी है। एएसआई की जांच और नमूनों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुआं कितना पुराना है और उसका ऐतिहासिक महत्व क्या है।



