
गाजियाबाद। गाजियाबाद व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने एक बार फिर निगम और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें आईना दिखाया है। और निगम के अफसरों व जनप्रतिनिधियों से सीधा सवाल उठाया है कि जब मेरठ में पुरानी दरो पर गृहकर लागू है और उसके बाद भी पिछले कई वर्षों से वहां पर नगर निगम एक्ट के अनुसार मकानों की आयु के अनुरूप गृहकर में छूट भी दी जा रही है तो गाजियाबाद वासियों के साथ ये अन्याय क्यों, क्या मेरठ में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को गाजियाबाद से कम तनख्वाह दी जाती है, क्या मेरठ में हमारे यहां से पेट्रोल डीजल सस्ते मिलते है, क्या मेरठ में निर्माण कार्यों की सामग्री यहां से सस्ती है, क्या मेरठ के जनप्रतिनिधि हमारे यहां के जन प्रतिनिधियों से ज्यादा काबिल है, हमारे शहर की जनता का अपने सभी जनप्रतिनिधियों से सीधा सादा एक ही प्रश्न है कि जब 30 जून 2025 की नगर निगम की बोर्ड बैठक में जब शहर के सभी विधायकों सांसद, मेयर और सभी दलों के पार्षद मौजूद थे, तब सभी जनप्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से ग्रहकर वृद्धि का प्रस्ताव निरस्त कराया था। बड़ी शान के साथ अपने स्वागत समारोह आयोजित कराये गए झूठी वाहवाही लूटी, तो अब शहर की जनता सीधा सा एक सवाल पूछती है कि अब इतना सब होने के बाद भी बढ़ा हुआ गृहकर वृद्धि जनता पर क्यों थोपी जा रही है। कहां है 30 जून को हुई बोर्ड मीटिंग के मिनट्स। जब जनता से मात्र 50 किलोमीटर दूर स्थित मेरठ में हम से आधा गृह कर वसूला जा रहा है और पूर्व से ही वहां पर नगर निगम एक्ट के अनुसार मकानों की आयु के हिसाब से छूट दी जा रही है तो गाजियाबाद वासियों के साथ ये भेदभाव क्यों।



