
संयुक्त जांच समिति का हुआ गठन
गाजियाबाद। डासना नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले तालाब सौन्दर्य करण को लेकर अत्यधिक मिट्टी खनन को एनजीटी एक बार फिर सख्त मूड में नजर आ रहा है। खसरा संख्या 2076, 2077 एवं 2078 में स्थित सार्वजनिक तालाब में डी-सिल्टिंग की आड़ में कथित अत्यधिक मिट्टी खनन के मामले को लेकर एनजीटी ने गंभीर मसला मानते हुए एक आदेश पारित किया है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश भू-तत्व एवं खनिकर्म निदेशालय तथा जिलाधिकारी की संयुक्त जांच समिति गठित कर दो माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जांच पूरी होने तक तालाब में डी-सिल्टिंग के नाम पर किसी भी प्रकार के मिट्टी खनन पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है।
वार्ड 15 के सभासद ने खोला मोर्चा
जानकारी के अनुसार बता दें कि वादी वसीम राजा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ओरिजिनल एप्लीकेशन संख्या 390/2026 में 10 जुलाई 2026 को पारित किया गया। याचिकाकर्ता वसीम राजा ने बताया कि डासना के इस तालाब का मामला पहले से ही एनजीटी में विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद डी-सिल्टिंग के नाम पर लगभग 15 से 20 फीट तक मिट्टी निकालकर अवैध खनन किया जा रहा था। इसकी शिकायत लगातार स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो माह की अवधि में जांच के आदेश दिए हैं तथा संयुक्त जांच समिति गठित कर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया है। उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी और तालाब को संरक्षित किया जाएगा।
पूर्व में भी एनजीटी में चल रहा सौन्दर्य करण से सम्बंधित मामला: अफसर अली

पूर्व याचिकाकर्ता अफसर अली ने बताया कि डासना तालाब के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का मामला लगभग चार वर्षों से एनजीटी में विचाराधीन है। एम.ए. संख्या 48/2022 में तालाब की सफाई, सौंदर्यीकरण एवं जल निकासी से जुड़े मुद्दों पर लगातार सुनवाई चल रही है। इस मामले में एनजीटी एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23.69 लाख रुपये तथा 2.45 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना भी लगाया जा चुका है, लेकिन आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि तालाब के चारों ओर बनाया गया ट्रैक भी निर्माण एवं कूड़े के मलबे से तैयार किया गया है, जिसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। विभाग स्वयं अपनी रिपोर्ट में डी-सिल्टिंग पूरी होने की बात कह चुका था, फिर भी उसी के नाम पर दोबारा खुदाई कर कथित अवैध खनन किया जा रहा था।
जांच सदस्य टीम का किया जाएगा पूरा सहयोग: अधिशासी अधिकारी डासना
अधिशासी अधिकारी महेश प्रताप श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि माननीय एनजीटी के आदेश का पालन किया जाएगा और हर संभव जांच में सहयोग किया जाएगा। फिलहाल माननीय एनजीटी द्वारा दो माह में पूरे मामले की जांच पड़ताल कर आख्या प्रस्तुत करने की बात की गई है। जबकि किसी भी तरह किसी मामले में रोक या स्टे की बात नहीं की गई है। नगर पंचायत का प्रयास है की डासना में एक बेहतर और सुंदर तालाब का सौन्दर्यकरण हो जिसको लेकर कार्य चल रहा है।



