
दिल्ली/गाजियाबाद। साइबर अपराध के मामले पूरे देश में बढ़े हैं, लेकिन राजधानी दिल्ली और एनसीआर का क्षेत्र साइबर अपराधियों की गिरफ्त में आता जा रहा है। गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (क4उ) द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई के दावों के बावजूद लगभग हर दिन किसी न किसी साइबर अपराध की खबर सामने आ रही है।
हाल की एक चौंकाने वाली घटना में दिल्ली स्थित एक न्यूज एजेंसी में कार्यरत पत्रकार दीपक सैनी के मोबाइल फोन में सेंध लगाकर साइबर अपराधियों ने तीन बार में 30 हजार रुपये उड़ा लिए। सैनी का आरोप है कि सार्वजनिक वाई-फाई का प्रयोग करते समय उनका मोबाइल फोन हैक कर लिया गया और 10-10 हजार रुपये की ठगी तीन बार में की गई। उन्होंने शिकायत की कि साइबर हेल्पलाइन 1930 पर काम नहीं करती और दिल्ली के कमलानगर थाने में दर्ज शिकायत पर गौर नहीं किया जाता। उन्होंने इस ठगी की शिकायत पीएमओ और बैंक के नोडल अधिकारी को भी की है।
गौरतलब है कि एनसीआर में हाल ही में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। नोएडा (सेक्टर 78) में एक 63 वर्षीय कारोबारी को 26 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर 1.45 करोड़ रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी। इसी तरह, नोएडा के सेक्टर 65 स्थित एक फिनटेक कंपनी का सर्वर हैक करके एपीआई के जरिए 2 करोड़ 42 लाख रुपये निकाल लिए गए। गाजियाबाद में स्विगी पर फर्जी रेस्टोरेंट बनाकर 52 क्रेडिट कार्ड धारकों से लाखों रुपये ठगने वाले एक आरोपी को साइबर क्राइम टीम ने गिरफ्तार किया है।
राजधानी दिल्ली में ही पिछले साल के मुकाबले इस साल साइबर ठगों द्वारा लोगों के बैंक खातों से निकाली गई रकम में 158 फीसदी का इजाफा हुआ है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल जून तक ऑनलाइन साइबर स्कैम में लोगों को 452 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 175 करोड़ रुपये था। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ही साइबर अपराधियों के हथकंडे भी २ङ्मस्रँ्र२३्र‘ं३ी िहोते जा रहे हैं, जिससे आम नागरिक आसानी से शिकार बन रहे हैं।



