
गाजियाबाद। इंटीग्रेटेड एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में 11वें अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस- ग्लोबल बीटीजीई 2026 के आयोजन का शुभारंभ हुआ। कॉन्फ्रेंस की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं उनके द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया। इस उद्धाटन सत्र में सबसे पहले अधिष्ठाता अकादमिक ने कॉन्फ्रेंस के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश विदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से कुल 61 शोध पत्रों को इस कॉन्फ्रेंस में दो दिनों में प्रस्तुत किया जाएगा। ये सभी शोध पत्र शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं छात्रों के द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा का स्वागत चेयरमैन एस. के. गुप्ता ने पुष्पगुच्छ, शौल एवं स्मृतिचिन्ह प्रस्तुत कर किया। साथ ही विशिष्ट अतिथि डॉ. विक गैफनी, कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया स्थित इंडोयूरो कंसल्टेंट्स के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर का स्वागत एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पंकज ए. गुप्ता ने पुष्पगुच्छ, शौल एवं स्मृतिचिन्ह प्रस्तुत कर किया। यह कार्यक्रम सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। कॉन्फ्रेंस में उद्योग जगत के विशेषज्ञों, शोधार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों सहित लगभग 300 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
उद्धाटन सत्र के प्रथम वक्ता के रूप में संस्थान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. पंकज ए. गुप्ता सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए बताया कि यह कैसे विकसित हो रही है तथा तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ वैश्वीकरण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके साथ ही डॉ. गुप्ता ने सामाजिक चुनौतियों, पर्यावरणीय चुनौतियों एवं व्यवसाय के बारे में प्रतिभागियों के साथ विभिन्न जानकारी साझा किया। वर्तमान समय में भी 2.5 अरब लोगों के पास अभी भी साफ पानी, आश्रय और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. गुप्ता ने कहा कि प्रगति कमरों से नहीं गूंजती, यह सहयोग और मिल-जुलकर काम करने से उभरती है। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. विक गैफनी ने कहा कि एक छात्र का प्रमुख दायित्व यह है कि वह अपने आसपास प्राप्त हो रहे प्रत्येक ज्ञान को पूर्ण निष्ठा के साथ आत्मसात करे, क्योंकि यही ज्ञान उसके व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विद्यार्थियों को अपने प्राचार्य, शिक्षकों, माता-पिता तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और आज्ञाकारिता की भावना



