
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों में आज, 1 जनवरी 2026 से एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू हो गया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (Ind-Aus ECTA) के तहत, ऑस्ट्रेलिया ने आज से भारतीय निर्यात की जाने वाली 100 प्रतिशत वस्तुओं पर से सभी प्रकार के सीमा शुल्क (टैरिफ) हटा दिए हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए इसे भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर बताया है। अब भारतीय उत्पाद ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय पटल पर ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और अधिक बढ़ जाएगी।
इस निर्णय से विशेष रूप से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labour-intensive sectors) जैसे कपड़ा, चमड़ा, आभूषण, और इंजीनियरिंग सामानों को जबरदस्त लाभ होने वाला है। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और कृषि उत्पादों, विशेषकर समुद्री भोजन, मसालों और कॉफी के निर्यात में भी बड़ी उछाल आने की उम्मीद है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में 8-14% की वृद्धि पहले ही देखी जा चुकी है, और अब शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को अपने उत्पादों को विकसित ऑस्ट्रेलियाई बाजार में सस्ती दरों पर बेचने का सीधा मौका मिलेगा।
व्यापारिक लाभ के साथ-साथ, यह कदम दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को भी मजबूत करेगा। 2022 में लागू हुए ECTA के तीन साल पूरे होने पर यह अंतिम चरण की छूट दी गई है, जो अब एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (CECA) की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘ड्यूटी-फ्री’ व्यवस्था से न केवल भारतीय राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि देश में लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। ऑस्ट्रेलिया का यह ‘तोहफा’ नए साल में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बूस्टर डोज की तरह काम करेगा, जो भारत को $5$ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से ले जाने में मदद करेगा।



