अपराधगाजियाबादनई दिल्ली

पुलिस विभाग के लिए बना पासपोर्ट प्रकरण जी का जंजाल, लापरवाही पर कई उप निरीक्षक, थाना प्रभारी और कॉन्स्टेबल को दिखाया लाइन का रास्ता, कैसे हो गयी पासपोर्ट जांच,

The passport case has become a major headache for the police department; several sub-inspectors, station house officers, and constables have been transferred to reserve duty due to negligence.

केंद्र एवं गृह मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट सेवा को बेहतर करने के लिए जहां लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। वहीं आवेदकों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार पासपोर्ट अदालत सहित कई योजनाएं धरातल पर कार्य कर रही है। जिससे आवेदकों की समस्याओं का समाधान और निस्तारण हो सके, जिसके अंतर्गत क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में लगातार आवेदको की समस्या के समाधान के लिए कार्य किया जा रहा है। हालांकि इसी बीच एक बड़ा मामला जब सामने आ जब दिल्ली से सटे कमिश्नरेट के एक थाना क्षेत्र में तीन गांव से फर्जी कागजातों के जरिए दो दर्जन से अधिक लोगों के पासपोर्ट जारी हुए। लिहाजा इस मामले में बाकायदा वेरिफिकेशन भी कंपलीट हुई और पासपोर्ट भी आवेदकों को प्राप्त हो गए। इस पूरे मामले में जहां दिल्ली के अलग-अलग जगह से पांच मोबाइल सिम फर्जी पते पर और फर्जी आईडी पर ली गई, तो वहीं कहीं ना कहीं डाकघर के पोस्टमैन कि भी सांठगांठ सामने आई, जिस पते पर पासपोर्ट बने वहां कोई घर नहीं था, यानी कि कहीं ना कहीं कई विभागों की लापरवाही उजागर हुई और जब इसका खुलासा हुआ तो कमिश्नरेट पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए लाइन का रास्ता दिखा दिया। इस बड़ी घटना के बाद पंचम तल पर भी इस पूरे प्रकरण की चर्चा सुनी जा सकती है। जहां कमिश्नरेट में चर्चाओं का बाजार गर्म है। तो वहीं लखनऊ के गलियारों में भी इस प्रकरण की चर्चा आम होती हुई नजर आई है। पुलिस सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि इतनी बड़ी घटना ने पूरे जनपद को हिला कर रख दिया, तो वहीं फर्जी कागजातों के जरिए बनवाए गए पासपोर्ट के मामले में अब विशेष तौर पर टीम काम कर रही है। जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आये हैं। पासपोर्ट बनाने वाले दलालों के द्वारा इसे बड़ी शातिराना अंदाज में पासपोर्ट बनाए गए। जिसमें अलग-अलग पत्ते और अलग-अलग नाम से दिल्ली में सिम खरीदी गई और उनका इस्तेमाल भी बाकायदा गाजियाबाद में किया गया, यानी कि दूसरे राज्य के रहने वाले लोगों के पासपोर्ट गाजियाबाद से बड़े आराम से बन गए। पुलिस सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में पुलिस के अधिकारियों द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई । जहां पांच लोगों को जेल भेजा गया। वहीं थाना प्रभारी सहित आधा दर्जन से अधिक दरोगाओं को लाइन का रास्ता दिखाया गया। साथ ही मुंशी के खिलाफ भी कार्यवाही की गई, मगर अभी जिन लोगों के पासपोर्ट बने हैं उनकी भी जांच पड़ताल की जा रही है। क्योंकि फर्जी कागजातों से बने पासपोर्ट कहीं ना कहीं सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस के अधिकारी अब इस मामले में पूरी तत्परता बरतते हुए मामले को गहराई से जांच पड़ताल करते हुए नजर आ रहे हैं। क्योंकि जिस तरह का मामला सामने आया उससे पुलिस कार्य प्रणाली, व्यवस्था, सुरक्षा को लेकर तमाम तरह के प्रयास धराशाई होते हुए नजर आए हैं। सूत्रों के अनुसार फर्जी कागजातों से बने पासपोर्ट और फिर वेरीफिकेशन और नकली पते पर प्राप्त हुए पासपोर्ट से भी कई सवाल खड़े किए हैं। जिसको लेकर पूरे कमिश्नरेट के अलावा लखनऊ के गलियारों में चर्चा चल रही है। पुलिस सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि जहां आम आदमी के पासपोर्ट को बनवाने के लिए काफी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। प्रधान के लेटर से लेकर दस्तावेज तक और घर तक पुलिस कर्मचारी वेरिफिकेशन करते हैं। वही इस तरह के फर्जीवाड़े ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का कार्य किया है। फिलहाल पासपोर्ट कार्यालय में भी इस मामले को लेकर हलचल देखी गई है, तो वहीं पुलिस महकमें में भी इस पूरे प्रकरण के बाद गंभीरता से विचार विमर्श किया जा रहा है कि आखिर इस तरह का बड़ा मामला कैसे आ गया। जब फीडबैक सेल से लेकर कई अभियान के अलावा कार्य चल रहे हैं। उसके बावजूद पुलिस कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं। 



Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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