
दिल्ली-NCR में प्रदूषण ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे समूची राजधानी ‘गंभीर’ श्रेणी की जहरीली हवा की चपेट में है। आज शनिवार, 20 दिसंबर 2025 की सुबह मध्य दिल्ली के व्यस्ततम इलाके ITO में सुबह 6 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 429 रिकॉर्ड किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक स्तर है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 40 में से 16 निगरानी स्टेशनों पर AQI 400 के पार ‘गंभीर’ जोन में दर्ज किया गया है। जहरीले स्मॉग और घने कोहरे के मिलन ने दृश्यता को न्यूनतम स्तर पर पहुँचा दिया है, जिससे न केवल लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, बल्कि आँखों में जलन और गले में खराश जैसी शिकायतें भी आम हो गई हैं।
वायु गुणवत्ता बिगड़ने का मुख्य कारण मौसम की प्रतिकूल स्थितियां और हवा की गति का अत्यंत धीमा होना माना जा रहा है। तापमान में गिरावट और कम हवा के कारण प्रदूषक तत्व (PM2.5 और PM10) जमीन के करीब ही फंस गए हैं, जिससे शहर के ऊपर एक मोटी धुंध की परत जमा हो गई है। आनंद विहार, विवेक विहार और जहांगीरपुरी जैसे हॉटस्पॉट्स में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसे श्वसन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों को सलाह दी है कि वे सुबह की सैर से बचें और बाहर निकलते समय अनिवार्य रूप से N-95 मास्क का उपयोग करें।
प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली सरकार और CAQM ने GRAP-IV (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) की सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके तहत गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है और BS-III पेट्रोल व BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर रोक है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम की समीक्षा के लिए पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण भी किया है, ताकि वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक राहत मिलने की संभावना कम है, क्योंकि कोहरा और शांत हवाएं प्रदूषकों को छंटने नहीं देंगी। यह संकट एक बार फिर स्थायी समाधान और कड़े नीतिगत बदलावों की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।



