
गाजियाबाद के निवासियों के लिए आज का दिन भी राहत भरा नहीं रहा, क्योंकि शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आज फिर से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह के समय शहर का औसत AQI 358 तक पहुंच गया, जिसने पूरे इलाके को एक घनी और जहरीली स्मॉग की चादर में लपेट दिया है। इंदिरापुरम, लोनी और वसुंधरा जैसे हॉटस्पॉट इलाकों में प्रदूषण का स्तर औसत से भी अधिक देखा गया, जहाँ हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक तत्व जमीन की सतह के करीब जम गए हैं। इस स्थिति के चलते दृश्यता (Visibility) में भारी गिरावट आई है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है और लोगों को आँखों में जलन तथा सांस लेने में भारी कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर के पीछे कई मौसमी और स्थानीय कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सर्दियों की कड़ाके की ठंड के साथ तापमान में गिरावट और हवा की धीमी रफ्तार ने PM2.5 और PM10 जैसे बारीक कणों को हवा में स्थिर कर दिया है। प्रशासन ने इसके मद्देनजर GRAP-4 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के तहत पहले ही सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं, जिनमें गैर-बीएस VI डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक और बड़े निर्माण कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी शामिल है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं और धूल भरे रास्ते स्थिति को और भी गंभीर बना रहे हैं। हालांकि प्रशासन धूल नियंत्रण के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का उपयोग कर रहा है, लेकिन हवा की गुणवत्ता में सुधार की रफ्तार काफी धीमी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस ‘बहुत खराब’ हवा को बच्चों, बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए बेहद जोखिम भरा बताया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम की सैर (Morning/Evening Walk) से बचें और बाहर निकलते समय अनिवार्य रूप से N95 मास्क का उपयोग करें। स्कूलों में आउटडोर एक्टिविटीज पर रोक लगा दी गई है और लोगों से घरों के भीतर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने या खिड़कियां बंद रखने की अपील की गई है। यदि आने वाले कुछ दिनों तक हवा की दिशा और गति में सकारात्मक परिवर्तन नहीं होता है, तो AQI के 400 (गंभीर श्रेणी) के पार जाने की आशंका बनी हुई है। यह स्थिति व्यक्तिगत और सरकारी स्तर पर पर्यावरण के प्रति गंभीरता दिखाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।



