यूजीसी के हालिया निर्णय के विरोध में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
हालिया निर्णय को लेकर देशभर में विरोध तेज

मनस्वी वाणी, संवाददाता
गाजियाबाद। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया निर्णय को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा द्वारा राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया, जिसमें इस निर्णय को योग्यता, परिश्रम और समान अवसर की संवैधानिक भावना के विपरीत बताया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी का यह फैसला देश की शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे शिक्षाविदों, छात्रों और अभिभावकों में व्यापक असंतोष है। यह विषय राष्ट्रीय मीडिया और सामाजिक मंचों पर भी प्रमुखता से उठ रहा है तथा विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संगठन इसके विरोध में आवाज बुलंद कर रहे हैं।
ज्ञापनकतार्ओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी वर्ग विशेष के अधिकारों के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण, संतुलित और योग्यता आधारित शिक्षा व्यवस्था के संरक्षण के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने चेताया कि शिक्षा नीति में असंतुलन से सामाजिक वैमनस्य बढ़ सकता है, जो राष्ट्रहित के प्रतिकूल होगा। राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि यूजीसी के इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर सभी संबंधित पक्षों से संवाद कर पुनर्विचार किया जाए तथा शिक्षा व्यवस्था में योग्यता और समान अवसर की संवैधानिक भावना को सुरक्षित रखा जाए। ज्ञापनकतार्ओं ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के दूरदर्शी नेतृत्व में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर देश की शैक्षणिक समरसता और सामाजिक संतुलन को बनाए रखा जाएगा। इस दौरान डा. हरिश शर्मा, रामकिशन शर्मा, ओमपाल शर्मा आदि मौजूद रहे।



