गाजियाबाद

गृहकर वृद्धि के विरोध में आमरण अनशन शुरू, व्यापार मंडल का आर-पार का ऐलान

“गृहकर की जनविरोधी बढ़ोतरी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई जारी रहेगी” — अवधेश शर्मा

गाजियाबाद | नगर निगम द्वारा शहरवासियों पर थोपी गई गृहकर (हाउस टैक्स) वृद्धि के विरोध में गाजियाबाद उद्योग व्यापार मंडल ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन के अध्यक्ष अवधेश शर्मा ने गुरुवार को नवयुग मार्केट स्थित अम्बेडकर पार्क में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन की शुरुआत की।

अनशन के पहले ही दिन बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न व्यापारिक संगठनों का जबरदस्त समर्थन देखने को मिला। अनशन स्थल पर पहुंचे लोगों ने गृहकर वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए आंदोलन को अपना समर्थन दिया और प्रशासन से इस निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की। कई संगठनों ने लिखित समर्थन पत्र सौंपकर इस संघर्ष में साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया।

आंदोलन के समर्थन में शहर के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे, जिनमें रामगोपाल शर्मा, कपिल सक्सेना, मनोज कौशिक, विवेक रावल, तिलक राज अरोड़ा, राजीव अग्रवाल, प्रीतम लाल, आर.के. गर्ग, आर.के. आर्य, आर.के. गोयल और संजीव गुप्ता शामिल रहे।

समाज सेवी आर.के. गर्ग ने कहा, “हम इस आंदोलन में व्यापारियों और आम जनता के साथ हैं। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और आवाज़ की लड़ाई है। प्रशासन को हमारी मांग तुरंत स्वीकार करनी चाहिए।”

इसके अलावा राजनगर और वसुंधरा क्षेत्र से संजीव अग्रवाल, दिनेश शर्मा, जयप्रकाश शर्मा, संतोष शर्मा तथा वसुंधरा से अपनी पूरी टीम के साथ वाई.के. दत्ता भी आंदोलन के समर्थन में पहुंचे। गाजियाबाद संघर्ष समिति की ओर से अमित गुप्ता, राजकुमार त्यागी और अविनाश त्यागी ने भी उपस्थित होकर समर्थन दिया।

आंदोलन की जानकारी आम जनता और मीडिया तक पहुँचाने की जिम्मेदारी गौरव बंसल और दिनेश जमदग्नि द्वारा संभाली जा रही है।

इस अवसर पर अध्यक्ष अवधेश शर्मा ने कहा कि यह केवल व्यापारियों की नहीं बल्कि पूरे गाजियाबाद की जनता की लड़ाई है। जब तक प्रशासन इस अनुचित गृहकर वृद्धि को वापस नहीं लेता, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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