अध्यात्म

रहमतों का महीना है रमजान :इमरान रिज़वान

रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र और बरकत वाला महीना है, जो रहमत, मगफिरत (माफी) और जहन्नम से निजात का पैगाम लाता है। इस माह में मुसलमान रोजा रखकर आत्म-संयम, इबादत और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। यह महीना कुरान के अवतरण का प्रतीक है और आत्मानुशासन व भाईचारे को बढ़ावा देता है, जिसे तीन अशरों (रहमत, माफी, नजात) में बांटा गया है।
रमजान से जुड़ी मुख्य बातें:
पाक महीना: रमजान में इबादत, कुरान की तिलावत, तरावीह और दुआओं का खास एहतमाम होता है। इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की नेकियां कई गुना बढ़ाकर कबूल करते हैं।
रहमत के तीन अशरे: रमजान को तीन हिस्सों (अशरों) में विभाजित किया गया है: पहला रहमत का (दया), दूसरा मगफिरत का (माफी) और तीसरा जहन्नम से निजात (आजादी) का है।
रोजा का महत्व: रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि झूठ, बुराई और गलत कामों से दूर रहकर आत्मा को शुद्ध करने और सब्र (धैर्य) सीखने का साधन है।
अल्लाह ताला ने सभी मुस्लिम पुरूष और महिलाओं पर रोजा फर्ज किया है। पूरे महीने का रोजा रखने वालों की सभी नेक दुआ जरूर कुबूल होती है। कुरान-ए-पाक की तिलावत और पांचों वक्त की नमाज पढ़ने के साथ गरीबों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें, क्योंकि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सवाब अल्लाह अपने बंदों को देता है।
इबादत और सदका: इस महीने में मुसलमान सुबह सहरी के बाद पूरे दिन रोजा रखते हैं और सूर्यास्त के समय इफ्तार कर रोजा खोलते हैं। साथ ही, जकात और सदका (दान) देकर गरीबों की मदद करना बहुत अहम माना जाता है।
सामाजिक भाईचारा: यह महीना समाज में एकता, प्यार और जरूरतमंदों के प्रति करुणा और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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