पर्यावरण

हिमालय क्षेत्र में तेज बारिश की घटनाओं में बढ़ोतरी

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के कारण हिमालय क्षेत्र में तेज बारिश (cloudbursts) और अचानक बाढ़ (flash floods) की घटनाओं में तेज़ी आई है, जिससे इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

बढ़ोतरी के मुख्य कारण

  • जलवायु परिवर्तन: यह सबसे बड़ा कारण है। बढ़ते वैश्विक तापमान के चलते वाष्पीकरण की दर बढ़ी है, जिससे वातावरण में अधिक नमी जमा होती है। यह बढ़ी हुई नमी अचानक और अत्यधिक वर्षा (heavy rainfall) के रूप में सामने आती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पिछले एक सदी में हिमाचल जैसे क्षेत्रों का औसत तापमान $1.6^\circ$ सेल्सियस तक बढ़ गया है, जिससे मौसम के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है।
  • ग्लेशियर का पिघलना: तापमान बढ़ने से ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे अस्थिर बर्फीली झीलें (glacial lakes) बन रही हैं। भारी बारिश के दौरान इन झीलों के फटने (Glacial Lake Outburst Floods – GLOF) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे विनाशकारी बाढ़ और मलबा बहकर नीचे आता है।
  • प्रदूषण और मानव हस्तक्षेप: प्रदूषण और विशेष रूप से अनियोजित निर्माण (unplanned construction) और वनों की अंधाधुंध कटाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। निर्माण कार्यों से पहाड़ों का प्राकृतिक इकोसिस्टम बदल गया है और मिट्टी की पकड़ कमजोर हुई है, जिससे भूस्खलन का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।
  • क्षेत्रीय जलचक्र में बदलाव: मानसून की गर्म हवाओं के पहाड़ों की ठंडी हवाओं के संपर्क में आने पर विशाल बादल बनते हैं, जो एक सीमित क्षेत्र में अचानक भारी बारिश करते हैं, जिसे बादल फटना (cloudburst) कहा जाता है।

इन सभी कारकों के चलते अब वर्षा की आवृत्ति भले ही कम हुई हो, लेकिन उसकी तीव्रता और विनाशकारीता काफी बढ़ गई है।

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