
ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे HRANA और Iran International) के अनुसार, सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। यह आंदोलन, जो शुरुआती तौर पर बेतहाशा महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ था, अब सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और धार्मिक शासन को उखाड़ फेंकने की मांग में बदल गया है। तेहरान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि कई अस्पतालों में घायलों और शवों के अंबार लगने की खबरें आ रही हैं।
प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए ईरानी सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे देश बाहरी दुनिया से लगभग कट गया है। इसके बावजूद, छन-छन कर आ रही खबरों से पता चलता है कि अब तक 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इनमें छात्र, वकील, पत्रकार और नागरिक कार्यकर्ता शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया है और संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगा सकता है। ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि ईरानी नेतृत्व इस बढ़ते दबाव के बीच बातचीत के लिए गुप्त रूप से संपर्क कर रहा है।
ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को ‘विदेशी साजिश’ करार दिया है और सुरक्षाकर्मियों की मौत पर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। शासन का कहना है कि वे “दंगाइयों” से निपटने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी “मौत या आजादी” के नारों के साथ सड़कों पर डटे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 के ‘हिजाब आंदोलन’ के बाद यह ईरान के इस्लामिक शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, ने ईरान से संयम बरतने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने की अपील की है। फिलहाल, ईरान में भविष्य की दिशा अनिश्चित बनी हुई है और गृहयुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा मंडरा रहा है।
ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे HRANA और Iran International) के अनुसार, सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। यह आंदोलन, जो शुरुआती तौर पर बेतहाशा महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ था, अब सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और धार्मिक शासन को उखाड़ फेंकने की मांग में बदल गया है। तेहरान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि कई अस्पतालों में घायलों और शवों के अंबार लगने की खबरें आ रही हैं।
प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए ईरानी सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे देश बाहरी दुनिया से लगभग कट गया है। इसके बावजूद, छन-छन कर आ रही खबरों से पता चलता है कि अब तक 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इनमें छात्र, वकील, पत्रकार और नागरिक कार्यकर्ता शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया है और संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगा सकता है। ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि ईरानी नेतृत्व इस बढ़ते दबाव के बीच बातचीत के लिए गुप्त रूप से संपर्क कर रहा है।
ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को ‘विदेशी साजिश’ करार दिया है और सुरक्षाकर्मियों की मौत पर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। शासन का कहना है कि वे “दंगाइयों” से निपटने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी “मौत या आजादी” के नारों के साथ सड़कों पर डटे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 के ‘हिजाब आंदोलन’ के बाद यह ईरान के इस्लामिक शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, ने ईरान से संयम बरतने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने की अपील की है। फिलहाल, ईरान में भविष्य की दिशा अनिश्चित बनी हुई है और गृहयुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा मंडरा रहा है।



