
गाजियाबाद के महाराजपुर इलाके से कानून व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दिल्ली-यूपी बॉर्डर के पास स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक एटीएम बूथ से साल 2023 में एक-दो बार नहीं, बल्कि कुल छह बार पैसे चोरी किए गए थे। आश्चर्यजनक बात यह है कि इतनी बड़ी और बार-बार होने वाली वारदातों के बावजूद, स्थानीय पुलिस ने उस समय मामला दर्ज करने में कोई सक्रियता नहीं दिखाई। बैंक और एटीएम की सुरक्षा संभालने वाली एजेंसी ‘साइंटिफिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड’ लंबे समय तक न्याय के लिए भटकती रही। अब, घटना के लगभग ढाई साल बीत जाने के बाद, न्यायालय के हस्तक्षेप और आदेश के बाद आखिरकार लिंक रोड थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
वारदातों का सिलसिला 12 जनवरी 2023 से शुरू होकर 21 मार्च 2023 तक चला, जिसमें शातिर चोरों ने बड़ी चालाकी से एटीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ कर लाखों रुपये पार कर दिए। सुरक्षा एजेंसी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार में ₹10,000, दूसरी बार ₹20,000, तीसरी बार ₹2.77 लाख, चौथी बार ₹1.56 लाख और पांचवीं व छठी बार में क्रमशः ₹1.51 लाख और ₹40,000 की चोरी हुई। कुल मिलाकर चोरों ने ₹6,54,500 की चपत लगाई। जांच में सामने आया कि चोरों ने एटीएम के शटर को जाम करने या सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ करने जैसी तकनीकी खामियों का फायदा उठाया था, लेकिन पुलिस ने प्रारंभिक शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया था।
अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और पुराने संदिग्धों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, ढाई साल का समय बीत जाने के कारण साक्ष्य जुटाना और अपराधियों तक पहुँचना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस देरी ने न केवल बैंक की सुरक्षा प्रणाली बल्कि पुलिस की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी कर स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। यह मामला इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक ढिलाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और पीड़ित को न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।



