
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ बनाने की औपचारिक घोषणा कर दी है। आज सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इस नए दल का ऐलान किया। कबीर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य के वंचितों, अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। टीएमसी से निष्कासन के बाद कबीर लगातार ममता बनर्जी सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे और अब उन्होंने एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच के जरिए अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया है।
हुमायूं कबीर ने आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए भी अपनी रणनीति साझा की है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन वे समान विचारधारा वाले दलों जैसे AIMIM, ISF और कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए भी तैयार हैं। विशेष रूप से उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ चुनावी तालमेल के संकेत दिए हैं, जिससे बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों, विशेषकर मुर्शिदाबाद और मालदा में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। कबीर ने रैली में कहा कि “जनता उन्नयन पार्टी” बंगाल की राजनीति में एक ‘निर्णायक शक्ति’ बनकर उभरेगी और वह किसी भी स्थिति में तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।
गौरतलब है कि हुमायूं कबीर हाल के दिनों में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ की तर्ज पर एक नई मस्जिद का शिलान्यास करने के अपने विवादित बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं। इस मुद्दे पर उन्हें टीएमसी से कड़ा विरोध झेलना पड़ा और अंततः उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। अब नई पार्टी के गठन के साथ, कबीर ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कबीर का यह कदम ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकता है, जो आने वाले चुनावों में टीएमसी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। फिलहाल, ‘जनता उन्नयन पार्टी’ के पंजीकरण और चुनाव चिन्ह को लेकर प्रक्रिया जारी है।



