गाजियाबाद में ‘एयर इमरजेंसी’: AQI 465 के साथ 4 साल का रिकॉर्ड टूटा, जहरीली धुंध की चादर में लिपटा शहर
गाजियाबाद। में वायु प्रदूषण का स्तर अपनी चरम सीमा को पार कर गया है। आज शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 465 दर्ज किया गया, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। लोनी, वसुंधरा और साहिबाबाद जैसे इलाके ‘डार्क ग्रे’ जोन में पहुँच गए हैं, जहाँ हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर प्लस’ (Severe+) श्रेणी में है। पूरे शहर पर घने स्मॉग (धुंध और धुएं का मिश्रण) की मोटी परत छाई हुई है, जिससे दोपहर में भी सूर्य की किरणें जमीन तक नहीं पहुँच पा रही हैं। इस स्थिति ने गाजियाबाद को एक ‘स्मॉग जोन’ में तब्दील कर दिया है, जहाँ सामान्य रूप से सांस लेना 40 से 50 सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक माना जा रहा है।
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (GRAP-4) के तहत कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। शहर में निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर डीजल से चलने वाले ट्रकों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने ‘पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी’ जारी करते हुए लोगों को घरों के भीतर रहने, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और बाहर निकलते समय N-95 मास्क अनिवार्य रूप से पहनने की सलाह दी है। सरकारी और निजी अस्पतालों में सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और अस्थमा के मरीजों की संख्या में अचानक 30-40% की वृद्धि देखी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा की धीमी गति और ‘तापमान व्युत्क्रमण’ (Temperature Inversion) के कारण प्रदूषक कण जमीन की सतह के करीब जम गए हैं। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं और स्थानीय औद्योगिक धुएं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। नगर निगम ने धूल को दबाने के लिए ‘एंटी-स्मॉग गन’ और सड़कों पर पानी के छिड़काव का अभियान तेज कर दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तेज हवाएं नहीं चलतीं या बारिश नहीं होती, तब तक राहत की उम्मीद कम है। प्रशासन अब विषम परिस्थितियों में स्कूलों को पूरी तरह ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने पर विचार कर रहा है।



