
गाजियाबाद। शहर के हिंदी भवन में संस्कार उपवन परिवार के तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय “श्री भक्तमाल जयंती उत्सव” के दूसरे दिन भी भक्तिमय वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न स्थानों से पधारे संतों की अमृतमयी वाणी सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कार्यक्रम में ब्रजवासी संत अनुराग कृष्ण शास्त्री जी, मृदुल कांत शास्त्री जी वृन्दावन, श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर गाजियाबाद के महंत श्री श्री 1008 महंत नारायण गिरी जी महाराज, तथा जगद्गुरु शंकराचार्य अनन्त श्रीविभूषित खामीनरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज (श्री आदिजगद्गुरु शंकराचार्य महासंस्थान, सुमेरुमठ काशी) सहित हापुड़ से पधारे महावीर भैया का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। सभी संतों की प्रेरणादायी वाणी से पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान राम अवतार जिंदल व अनिल गर्ग ने सभी संतों का माला और शाल ओढ़ाकर सम्मान किया।

संस्कार उपवन के संस्थापक पूज्य श्री नवनीतप्रिय दास जी ने भक्तमाल के प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जैसे कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। उन्होंने संतों के जीवन प्रसंगों के माध्यम से सनातन संस्कृति और भक्ति मार्ग का महत्व बताया।
ब्रजवासी संत अनुराग कृष्ण शास्त्री जी ने अपने मधुर भजनों से वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान ने हमें बुद्धि दी है, लेकिन सही विवेक सत्संग से ही प्राप्त होता है। संतों की वाणी और जीवन से हमें भक्ति, सेवा और संस्कारों की प्रेरणा मिलती है। उनका भजन—
“कन्हैया के एक रोज रोकर पुकारा,
कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा…”
सुनकर पूरा सभागार भक्ति में झूम उठा।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान प्रदीप कुमार, शरद अग्रवाल, अनुराग गोयल, विनीत माहेश्वरी, रामनिवास बंसल आदि ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्था में वेद प्रकाश बंसल, मुकेश कुमार, अतुल गुप्ता, आशीष सिंघल, मुकेश गोयल, विवेक गोयल, सीमा गोयल, राजकुमार सिंघल, संजय अग्रवाल, शशि श्रीवास्तव, भानु शिसौदिया आदि का विशेष सहयोग रहा।
अंत में सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।



