
, देहरादून: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में वनाग्नि की रोकथाम को लेकर बैठक की। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर लगे फायर हाइड्रेंट्स के लिए डेडिकेटेड प्रेशर पाइपलाइन व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश देते हुए पेयजल विभाग को इसका प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने को कहा। इसके अलावा मुख्य सचिव ने सभी लीसा डिपो में प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने वन, मौसम एवं वन सर्वेक्षण संस्थान को फारेस्ट फायर के लिए भी आपदा की तर्ज पर प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे फारेस्ट फायर की संभावनाओं का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा, जिससे जानमाल के नुकसान को रोकने और कम करने में सहायता मिलेगी।
मुख्य सचिव ने जंगलों से पिरूल के निस्तारण और पिरुल ब्रिकेट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिरुल ब्रिकेट को ईंधन के विकल्प के तौर पर स्थापित करने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक यूनिट लगाई जाएं। जिससे वनाग्नि को रोकने में सहायता मिलेगी और वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता भी बढ़ेगी।



