
बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। ढाका के ‘एवरकेयर अस्पताल’ में उन्होंने अंतिम सांस ली, जहाँ वे लंबे समय से लीवर सिरोसिस, मधुमेह और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे बांग्लादेश में शोक की लहर दौड़ गई है और ढाका की सड़कों पर उनके समर्थकों की भारी भीड़ जमा होने लगी है। खालिदा जिया न केवल देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि उन्होंने दशकों तक बांग्लादेश की सत्ता संरचना और लोकतांत्रिक संघर्षों में एक केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
खालिदा जिया का राजनीतिक सफर साहस और विवादों का मिश्रण रहा। 1981 में अपने पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और तानाशाही के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। वे तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री चुनी गईं (1991, 1996 और 2001), जिसके दौरान उन्होंने शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन का उत्तरार्ध कानूनी लड़ाइयों और जेल की सजाओं से घिरा रहा। शेख हसीना की सरकार के दौरान उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में सजा सुनाई गई थी, लेकिन हालिया तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया था, जिससे उनके समर्थकों को उनके सक्रिय राजनीति में लौटने की उम्मीद जगी थी।
उनके निधन पर अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। बीएनपी ने अपने “अपराजित नेता” के सम्मान में देशव्यापी शोक की घोषणा की है। विश्लेषकों का मानना है कि खालिदा जिया के जाने से बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है, विशेषकर ऐसे समय में जब देश एक नाजुक राजनीतिक संक्रमण से गुजर रहा है। उनके अंतिम संस्कार के लिए ढाका में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, क्योंकि लाखों समर्थकों के जुटने की संभावना है। बेगम जिया को उनके समर्थकों द्वारा ‘देशनेत्री’ के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक अपने राजनीतिक सिद्धांतों और दल के अस्तित्व के लिए संघर्ष किया।



