
विश्व मंच पर भाषाई समावेशिता की एक नई मिसाल पेश करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहली बार हिंदी में अपना नववर्ष संदेश जारी किया है। 2026 के आगमन की पूर्व संध्या पर जारी इस विशेष वीडियो संदेश में गुटेरेस ने विश्व के करोड़ों हिंदी भाषी लोगों को संबोधित करते हुए शांति और एकजुटता का आह्वान किया। हिंदी भाषा का चयन वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती धमक और संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। गुटेरेस ने अपने संबोधन की शुरुआत “नमस्ते” और नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ की, जिसने भारतीय नागरिकों और प्रवासी भारतीयों के बीच व्यापक प्रशंसा बटोरी है।
अपने संदेश के मुख्य भाग में, महासचिव ने दुनिया के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए एक अत्यंत मानवीय अपील की। उन्होंने वैश्विक नेताओं और शक्तिशाली राष्ट्रों से आग्रह किया कि वे सैन्य खर्च (Military Expenditure) के बजाय सतत विकास (Sustainable Development) को अपनी प्राथमिकता बनाएं। गुटेरेस ने चिंता जताई कि वर्तमान में दुनिया भर में हथियारों और युद्ध की तैयारियों पर खरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि गरीबी, भुखमरी और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं विकराल रूप ले रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंदूकों और मिसाइलों से सुरक्षा नहीं खरीदी जा सकती, बल्कि असली सुरक्षा लोगों की भलाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करने से आती है।
महासचिव ने अपने संबोधन के समापन में 2026 को ‘समाधान और शांति का वर्ष’ बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि हम युद्ध के मैदानों को छोड़कर संवाद की मेजों पर लौटें।” उनके इस हिंदी संदेश को सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा गया है, जहाँ लोगों ने इसे भाषाई विविधता का सम्मान और विकासशील देशों की आवाज़ को महत्व देने वाला कदम बताया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा हिंदी में यह पहल न केवल भारत के साथ कूटनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करेगी, बल्कि वैश्विक शांति के संदेश को आम जनमानस तक पहुँचाने में भी कारगर सिद्ध होगी। गुटेरेस की यह अपील वर्तमान वैश्विक तनावों के बीच एक आवश्यक चेतावनी और भविष्य के लिए एक नई आशा की किरण बनकर उभरी है।



