
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज, 8 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। वर्ष 2026 की यह पहली बड़ी सुरक्षा समीक्षा बैठक है, जिसमें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, और सेना व खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु सर्दियों के मौसम में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर बर्फबारी का फायदा उठाकर होने वाली घुसपैठ की कोशिशों को “जीरो” पर लाना है। गृह मंत्री दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में छिपे विदेशी आतंकवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘सर्च ऑपरेशन’ की प्रगति का भी जायजा ले रहे हैं।
रणनीतिक चर्चा के दौरान, सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग और एंटी-ड्रोन तकनीक के उपयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए ‘मल्टी-लेयर सुरक्षा ग्रिड’ को और अधिक सक्रिय किया गया है। गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों को निर्देश दिए हैं कि वे न केवल आतंकवादियों, बल्कि उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और स्थानीय समर्थन नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त करें। बैठक में जम्मू क्षेत्र के राजौरी, पुंछ और डोडा जैसे पहाड़ी जिलों में सेना की तैनाती और ‘एरिया डोमिनेशन’ (क्षेत्र प्रभुत्व) की रणनीति पर भी गंभीर मंथन हो रहा है ताकि स्थानीय निवासियों में सुरक्षा का भाव बना रहे।
आगामी 76वें गणतंत्र दिवस समारोहों को देखते हुए यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। गृह मंत्री ने एजेंसियों को ‘अलर्ट मोड’ पर रहने और किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए आपसी तालमेल बढ़ाने को कहा है। इसके अतिरिक्त, केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों और शांति बहाली के प्रयासों की समीक्षा भी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में और तेजी आएगी और सीमा पार से होने वाली किसी भी उकसावे की कार्रवाई का कड़ा जवाब देने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।



