
श्रीलंका प्रवास के दौरान पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज नुवाराएलिया स्थित पवित्र अशोकवाटिका पहुँचे। यह वही ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल है, जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है और जहाँ माता सीता ने अपने वनवास काल का समय व्यतीत किया था। शांत, हरित एवं आध्यात्मिक वातावरण से परिपूर्ण इस दिव्य स्थली पर गुरुजी ने श्रद्धापूर्वक दर्शन एवं पूजन कर सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराया।

अशोकवाटिका की पावन भूमि पर उपस्थित भक्तों ने भी आशीर्वाद प्राप्त किया और धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्मिक एकता का संदेश ग्रहण किया।
गुरुजी के वहाँ पहुँचने पर हेलीपैड पर श्रीलंका सरकार की केंद्रीय पर्यटन मंत्री एवं स्थानीय मेयर द्वारा उनका आत्मीय एवं सम्मानपूर्ण स्वागत किया गया। यह सम्मान न केवल पूज्य गुरुजी के प्रति श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि भारत और श्रीलंका के मध्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की प्रगाढ़ता को भी दर्शाता है। यह संपूर्ण प्रवास दोनों देशों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।



