
जांजगीर-चाम्पा महुआ पेड़ से टपक रहे फूल, बीनकर लाभ जिले के दल्हा पहाड़ वनांचल में पीला सोना कहे जाने वाले महुआ के फूल टपकना शुरू हो गया है। फूल समेटने के लिए ग्रामीण पूरे परिवार के साथ सुबह से ही जंगलों व खेतों की ओर चले जाते हैं। इस दौरान सुरक्षा के लिए हाथ में लाठी व महुआ फूल रखने के लिए टोकरी साथ लेकर जाते हैं। महुआ पेड़ से टपक रहे फूल, बीनकर लाभ कमा रहे ग्रामीण जिले के अकलतरा ब्लॉक के ग्राम कटघरी दल्हा पहाड़ वनांचल में पीला सोना कहे जाने वाले महुआ के फूल टपकना शुरू हो गया है। फूल समेटने के लिए ग्रामीण पूरे परिवार के साथ सुबह से ही जंगलों व खेतों की ओर चले जाते हैं। इस दौरान सुरक्षा के लिए हाथ में लाठी व महुआ फूल रखने के लिए टोकरी साथ लेकर जाते हैं। सूर्य के चढ़ते ही पेड़ से फूल गिरना कम हो जाता है। गर्मी का मौसम आते ही महुआ के पेड़ों पर आई कूंचे फूलों से लद आए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि महुआ के गुणों को देखते हुए प्रशासन को शराब से इतर महुआ से पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार करने की योजना बनाना चाहिए। ऐसा होने से क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के कई द्वार खुलेंगे। क्षेत्र में समृद्धि आएगी और महुआ से शराब निर्माण में कमी आएगी। कटघरी निवासी मोहन सिंह एवं अन्य ग्रामीणों ने दूरदर्शन समाचार में बताया कि महुआ फूल बीनने में काफी मेहनत होती है। पहले तो इनकी रखवाली आधी रात से करनी पड़ती है, तब जाकर महुआ फूल बच पाते हैं। वरना जानवर इन्हें खा जाते हैं। महुआ फूल पेड़ से नीचे एक-एक कर गिरते हैं जो बिखर जाते हैं। सुबह-सुबह परिवार सहित महुआ के फूल बीनने के लिए जाते हैं। एक दिन में चार से पांच किलो महुआ बीन लेते हैं। इसे तीन से चार दिन धूप में सुखाने के बाद व्यापारियों को बेच देते हैं। इसके बदले 30 से 40 रुपये प्रति किलो का दाम आसानी से मिल जाता है। गर्मी के सीजन मजदूरी की स्थिति खराब होने के बाद महुआ से आदिवासी ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार का सृजन न के बराबर रह गया था। जिसके कारण ग्रामीणों ने घरों में संग्रहित महुआ को वस्तु विनिमय करते हुए गृहस्थी की अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से चलाया। हर बाई ने बताया कि बीते साल महुआ तीन से साढ़े तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल बीके थे आयुर्वेद में भी है महत्व ग्रामीणों ने बताया कि इसमें कई आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं। महुआ फूल का इस्तेमाल कई तरह से होता है। इसमें कई आयुर्वेदिक गुण होने के कारण महुआ का प्रयोग कई दवाओं में होता है। पेड़ के पत्तों से लेकर बीज तक में औषधीय गुण पाए जाते हैं। महुआ का फूल काफी पौष्टिक होता है। इसके बीज से औषधीय व उन्ना्त किस्म के रिफाइन का निर्माण होता है। तेल निकालने के बाद बची खली जानवरों को खिलाने के काम आती है।


