नई दिल्ली

ईरान-इज़राइल संघर्ष के 27वें दिन अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव

ईरान-इज़राइल संघर्ष के 27वें दिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने 15 सूत्रीय प्रस्ताव ठुकराकर अपनी शर्तें रखी हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है।

पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इज़राइल संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि उनकी ईरान के साथ बातचीत जारी है, जबकि ईरान समय-समय पर इन दावों को खारिज करता रहा है।

ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ उसकी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है और उसने ही अमेरिका को बातचीत के लिए मजबूर किया है। इस बीच ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसे जल्द गंभीर रुख अपनाना होगा, अन्यथा स्थिति हाथ से निकल सकती है।

दरअसल, अमेरिका की ओर से ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम रोकने और यमन के हूती तथा लेबनान के हिज़्बुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन बंद करने की शर्तें शामिल थीं। इसके बदले ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सीमित नियंत्रण की पेशकश की गई थी।

हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को शुरुआत में “अत्यधिक” बताते हुए खारिज कर दिया। बाद में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने संकेत दिया कि विभिन्न प्रस्तावों पर देश के शीर्ष नेतृत्व विचार कर रहा है।

इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी पांच शर्तें रखी हैं, जिनमें सभी हमलों का पूर्ण विराम, भविष्य में युद्ध न थोपे जाने की गारंटी, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई, पूरे क्षेत्र में संघर्ष का अंत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने अधिकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता शामिल है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में शुरुआती दौर में अमेरिका और इज़राइल को उम्मीद थी कि ईरान पर जल्द दबाव बनाया जा सकेगा, लेकिन हालात इसके उलट रहे। अब दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और कूटनीतिक प्रयासों के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

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Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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