
दिल्ली विधानसभा का वर्तमान सत्र राष्ट्रीय राजधानी के दो सबसे संवेदनशील मुद्दों—जहरीले वायु प्रदूषण और धार्मिक भावनाओं के अपमान—को लेकर रणभूमि में तब्दील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने शहर में खतरनाक स्तर पर पहुँचे AQI (Air Quality Index) को लेकर सदन के भीतर गैस मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। ‘आप’ नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों की निष्क्रियता के कारण दिल्ली ‘गैस चैंबर’ बनी हुई है। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सदन के वेल तक पहुँच गए।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्ता पक्ष पर सिख धर्मगुरुओं और धार्मिक प्रतीकों के अपमान का गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान ‘आप’ के कुछ सदस्यों ने ऐसी टिप्पणियां कीं जिससे एक विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। विपक्षी दल ने दोषी विधायकों के इस्तीफे और सदन में माफी की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही ठप कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच जारी तीखी नोकझोंक और व्यक्तिगत हमलों के कारण सदन में कोई भी विधायी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो सका।
इस राजनीतिक खींचतान के बीच, दिल्ली की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक और विकास कार्य अधर में लटके नजर आ रहे हैं। जहाँ एक तरफ प्रदूषण के समाधान के लिए बजट और नई योजनाओं पर चर्चा होनी थी, वहीं दूसरी तरफ यह सत्र पूरी तरह से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की भेंट चढ़ गया है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि जब तक धार्मिक अपमान के मुद्दे पर कड़ा कदम नहीं उठाया जाता, वे विरोध जारी रखेंगे। वहीं, ‘आप’ का कहना है कि भाजपा असल मुद्दों जैसे प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद पैदा कर रही है। वर्तमान में सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है और सत्र की अवधि बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।



