बुकिंग के बाद भी रसोई गैस सिलेंडर ना देने पर लोगों ने किया हंगामा
- तहसीलदार,आपूर्ति निरीक्षक ने गोदाम पर की छापेमारी

दीपक त्यागी मोदीनगर,संवाददाता।
बकिंग के बाद भी रसोई गैस सिलेंडर ना मिलने से नाराज लोगों ने धीरेंद्र गैस एजेंसी पर हंगामा किया। लोगों ने जिलाधिकारी से इस मामले की शिकायत की है। तहसील प्रशासन व आपूर्ति विभाग ने एजेंसी गोदाम पर छापेमारी कर रिकार्ड चैक किया। दिल्ली मेरठ मार्ग पर मोदी मंदिर के सामने स्थित धीरेंद्र गैस एजेंसी पर शुक्रवार को लोग एकत्र होकर पहुंचे और हंगामा करना शुरू कर दिया। आरोप है कि ऑनलाइन गैस बुक करने के बाद भी सिलेंडर नहीं दिया जा रहा है। गांव फफराना निवासी सचिन कुमार ने बताया कि मेरा घरेलू कनेक्शन है। एक सप्ताह पहले ऑनलाइन गैस बुकिंग की थी। मैसेज आया कि जल्द गैस मिल जाएगी। लेकिन अब फिर से मैसेज आया कि गैस डिलीवरी हो गई है। हंगामा बढ़ने की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा बुझाकर। तहसीलदार रजत कुमार ,आपूर्ति निरीक्षक ने टीम के साथ एजेंसी के गोदाम गांव मानकी में छापेमारी कर रिकार्ड चैक किया। तहसीलदार रजत कुमार ने बताया कि जांच की जा रही है।यदि जांच में कुछ गड़बड़ मिली तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। रसोई गैस की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाशत नहीं की जाएगी।
मोदीनगर की धीरेंद्र गैस एजेंसी पर शुक्रवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा। गांव फफराना निवासी सचिन कुमार ने बताया कि बुकिंग के बाद पहले “जल्द डिलीवरी” का मैसेज आया, फिर बिना सिलेंडर दिए ही “डिलीवर हो गया” का मैसेज आ गया।
2. प्रशासन की छापेमारी – रिकॉर्ड खंगाले गए
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया।तहसीलदार रजत कुमार और आपूर्ति निरीक्षक की टीम ने गांव मानकी स्थित एजेंसी गोदाम पर छापेमारी कर रिकॉर्ड की जांच की।प्रशासन ने साफ कहा है कि यदि गड़बड़ी मिली तो कड़ी कार्रवाई होगी और कालाबाजारी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कमर्शियल सिलेंडर बंद, फिर भी होटल-रेस्टोरेंट कैसे चल रहे?
यह मामला एक बड़े सवाल को भी जन्म देता है—जब सरकार की ओर से कमर्शियल सिलेंडर पर सख्ती और सीमाएं तय की गई हैं, तो मोदीनगर में होटल और रेस्टोरेंट आखिर कैसे चल रहे हैं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि: घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों में हो रहा हैकालाबाजारी के जरिए सिलेंडर होटल-ढाबों तक पहुंचाए जा रहे हैंइससे आम उपभोक्ता को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा
4. बुकिंग सिस्टम पर सवाल – “बुकिंग ही नहीं हो रही”
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि: ऑनलाइन बुकिंग करने पर भी सिस्टम फेल हो रहा है बार-बार कोशिश के बावजूद बुकिंग दर्ज नहीं हो रही कुछ मामलों में बिना डिलीवरी के ही “डिलीवर” दिखा दिया जाता हैयह सीधे तौर पर डिजिटल सिस्टम और एजेंसी की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
. 45 दिन की गाइडलाइन बनाम 30 दिन में खत्म होने वाला सिलेंडर
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार एक उपभोक्ता को 45 दिन के अंतराल में ही अगला सिलेंडर मिलता है। लेकिन हकीकत यह है कि: कई परिवारों में सिलेंडर 25–30 दिन में ही खत्म हो जाता है ऐसे में उन्हें 15–20 दिन बिना गैस के रहना पड़ता हैयह स्थिति खासकर बड़े परिवारों और ग्रामीण इलाकों में और भी गंभीर हो जाती है।
कालाबाजारी का शक – आम जनता पर असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि:एजेंसियों द्वारा जानबूझकर सप्लाई रोकी जाती है फिर वही सिलेंडर ऊंचे दामों पर ब्लैक में बेचे जाते हैं इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है
प्रशासन का आश्वासन
तहसीलदार रजत कुमार ने बताया कि जांच जारी है। अगर किसी भी तरह की गड़बड़ी या कालाबाजारी सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
मोदीनगर का यह मामला सिर्फ एक एजेंसी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गैस वितरण सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।
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