हिमाचल में आर्थिक संकट, सरकार ने सैलरी कटौती का निर्णय लिया
आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए जरूरी

नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। चुनावी वादों और मुफ्त योजनाओं का असर अब राज्य के बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार को मुख्यमंत्री से लेकर कर्मचारियों तक की सैलरी में कटौती जैसे सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं।
राज्य का बजट 58,514 करोड़ रुपये से घटकर 54,928 करोड़ रुपये रह गया है, यानी करीब 3,586 करोड़ रुपये की कमी आई है। इसी के चलते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित मंत्रियों और विधायकों के वेतन में कटौती का निर्णय लिया गया है।
सरकार के फैसले के अनुसार मुख्यमंत्री के वेतन में 50 प्रतिशत, मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। इसके साथ ही अगले 6 महीनों तक वेतन वृद्धि पर भी रोक लगा दी गई है। ग्रुप D कर्मचारियों को भी इस अवधि में इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा।
राज्य पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। 2017 में जहां कर्ज लगभग 48 हजार करोड़ रुपये था, वहीं अब यह 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। गंभीर वित्तीय स्थिति के बावजूद फरवरी 2026 में ही राज्य सरकार ने 1,030 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया।
इसे लेकर सीएम सुक्खू का कहना है कि ये फैसले आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए जरूरी हैं। वहीं विपक्ष का आरोप है कि मुफ्त योजनाओं ने राज्य की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया है और यह संकट उसी का परिणाम है।



