न्यूनतम वेतन वृद्धि नाकाफी, सीटू की ₹26,000 लागू करने की मांग
महंगाई के दौर में मजदूरों के साथ मज़ाक

गाजियाबाद । गौतम बुद्ध नगर में श्रमिकों द्वारा स्वतःस्फूर्त बड़े आंदोलन और व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा देर रात्रि न्यूनतम वेतन में वृद्धि की घोषणा की गई। किंतु श्रमिक संगठन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने इस बढ़ोतरी को अपर्याप्त और वास्तविक महंगाई के मुकाबले “ऊंट के मुंह में जीरा” करार दिया है।
सर्व नेता जेपी शुक्ला ने बताया कि सरकार द्वारा घोषित संशोधित वेतन के अनुसार गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690, अर्द्धकुशल श्रमिकों का ₹12,445 से ₹15,059 तथा कुशल श्रमिकों का ₹13,940 से ₹16,864 किया गया है। प्रदेश के अन्य जिलों के लिए अकुशल श्रमिक ₹12,356, अर्द्धकुशल ₹13,591 और कुशल श्रमिक ₹15,224 निर्धारित किया गया है।
सर्व नेता जेपी शुक्ला ने बताया कि बुद्ध नगर कमेटी ने इस बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए कहा कि यह महंगाई की वर्तमान स्थिति से बिल्कुल मेल नहीं खाती। संगठन ने मांग की है कि गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को दिल्ली के समकक्ष किया जाए, जहां अकुशल श्रमिक ₹18,456, अर्द्धकुशल ₹20,371, कुशल ₹22,411 और अति कुशल श्रमिकों का वेतन ₹24,356 तक है।
सर्व नेता जेपी शुक्ला ने बताया कि यह भी मांग उठाई है कि न्यूनतम वेतन ₹26,000 घोषित करने के लिए एक वेज बोर्ड कमेटी का गठन किया जाए। संगठन के अनुसार हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में लगभग 35% वेतन वृद्धि करते हुए अकुशल श्रमिक ₹15,220, अर्द्धकुशल ₹16,780, कुशल ₹18,500 और अति कुशल ₹19,425 तय किया गया है, जो उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक न्यायसंगत है।
सर्व नेता जेपी शुक्ला ने बताया कि ने कहा कि उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन का अंतिम संशोधन वर्ष 2014 में हुआ था, जिसे 2019 में पुनः संशोधित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वर्तमान बढ़ोतरी श्रमिकों के साथ अन्याय है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सीटू गौतम बुद्ध नगर के नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा को पिछले पांच दिनों से स्थानीय पुलिस द्वारा उनके घर में नजरबंद किया गया है। सीटू ने उनकी तत्काल रिहाई, मोबाइल वापसी, गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई तथा श्रमिक मुद्दों पर ट्रेड यूनियनों के साथ वार्ता शुरू करने की मांग की है।
सीटू ने स्पष्ट किया है कि यदि श्रमिकों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



