
वन विभाग की लापरवाही या सबसे बड़ा घोटाला?
मुरादनगर। संवाददाता
मुरादनगर गंग नहर पटरी के दोनों ओर हर वर्ष मार्च से जून माह के बीच वनस्पतियों और वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह आग प्राकृतिक नहीं बल्कि सफाई के नाम पर जानबूझकर लगाई जाती है। इससे न केवल हरियाली नष्ट हो रही है, बल्कि आसपास के किसानों की फसलें भी इसकी चपेट में आकर बर्बाद हो रही हैं। मामले को लेकर वन विभाग और सिंचाई विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार गंग नहर पटरी पर हर साल सफाई और पौधरोपण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गर्मी शुरू होते ही सूखी घास और वनस्पतियों में आग लगा दी जाती है। इससे कई किलोमीटर क्षेत्र की हरियाली कुछ ही घंटों में जलकर राख हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से सफाई और रखरखाव किया जाए तो आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

इस मामले में जब सिंचाई विभाग के अधिकारी विकास त्यागी से बात की गई तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि गंग नहर पटरी वन विभाग को लीज पर दी गई है और यह पूरा क्षेत्र वन विभाग के कार्यक्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनाओं से सिंचाई विभाग का कोई लेना-देना नहीं है। वहीं दूसरी ओर वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर ने फोन तक नहीं उठाया।
मामले को लेकर जब जिलाधिकारी गाजियाबाद से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनके कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने फोन रिसीव किया और फायर ब्रिगेड को सूचना देने की बात कहकर अपना जवाब दे दिया। इसी तरह जिलाधिकारी मेरठ कार्यालय में भी अधिकारियों के बजाय कर्मचारियों ने ही फोन उठाया। इससे लोगों में नाराजगी है कि जब मीडिया कर्मियों के फोन तक अधिकारी नहीं उठा रहे, तो आम जनता की समस्याएं आखिर कौन सुनेगा।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गंग नहर पटरी पर लगाई जाने वाली आग सीधे-सीधे पर्यावरण नियमों और एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन है। हर साल हजारों पौधे और प्राकृतिक वनस्पतियां जलकर नष्ट हो जाती हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। आग लगने के कारण आसपास रहने वाले लोगों को धुएं और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई बार आग बेकाबू होकर किसानों के खेतों तक पहुंच जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। गेहूं कटाई के दौरान लगी आग में एक किसान की करीब 20 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई थी। पीड़ित किसान को आज तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला। किसानों का कहना है कि प्रशासन केवल जांच और कार्रवाई का आश्वासन देता है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
क्षेत्रीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि गंग नहर पटरी पर हर साल लगने वाली आग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि सफाई और पौधरोपण के नाम पर खर्च होने वाला सरकारी धन आखिर कहां जा रहा है। लोगों ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में गंग नहर पटरी की हरियाली पूरी तरह समाप्त हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से आग लगाने की घटनाओं पर रोक लगाने, नियमित निगरानी करने और किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।



