गाजियाबादस्वास्थ्य

एनएचएम कर्मचारियों का सीएमओ कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना

2 अक्टूबर को लखनऊ कूच करेंगे प्रदेशभर के संविदा कर्मचारी
गाजियाबाद, संवाददाता। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के नेतृत्व में नौ अक्तूबर से सीएमओ कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया गया है। मांगें पूरी नहीं होने पर 12 अक्तूबर को प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी लखनऊ कूच कर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।


संघ की जिलाध्यक्ष हिमानी कौशिक और जिला महामंत्री डॉ. चेतन वर्मा ने बताया कि प्रदेश में करीब एक लाख कर्मचारी पिछले 18 से 20 वर्षों से एनएचएम के तहत सेवाएं दे रहे हैं। ग्रामीण और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कोरोना महामारी के दौरान भी कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया गया और न ही समान कार्य के लिए समान वेतन मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में एनएचएम कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, ईपीएफ और नियमितीकरण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। उत्तर प्रदेश में भी इन सुविधाओं को लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, 22 सितंबर को मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर दस दिन में सकारात्मक कार्रवाई की मांग की गई थी। निर्धारित समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया है।
नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा कर्मियों को नियमित करना और समान कार्य-समान वेतन लागू करना शामिल है। इसके अलावा दस लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, महंगाई भत्ता, ईपीएफ, एचआरए और ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग की गई है। गैर जनपद स्थानांतरण नीति बहाल करने, अनुकंपा नियुक्ति, आउटसोर्स कर्मचारियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करने और नियमित भर्तियों में 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग भी उठाई गई है।
संघ ने स्पष्ट किया कि धरने के दौरान आपातकालीन सेवाएं बाधित नहीं की जाएंगी। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति में शासन-प्रशासन को जिम्मेदार बताया है। 

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