गोवा मुक्ति दिवस भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है जब 19 दिसंबर, 1961 को गोवा लगभग 450 वर्षों के पुर्तगाली दमनकारी शासन से मुक्त हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने गोवा को मातृभूमि से पुनः जोड़ने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह केवल एक राज्य की मुक्ति नहीं थी, बल्कि भारत की राष्ट्रीय यात्रा का एक ऐसा निर्णायक अध्याय था, जिसने देश की संप्रभुता और अखंडता को पूर्णता प्रदान की। प्रधानमंत्री के अनुसार, गोवा की मुक्ति ने दुनिया को यह संदेश दिया कि नए भारत के संकल्प के सामने कोई भी औपनिवेशिक शक्ति टिक नहीं सकती।
यह ऐतिहासिक दिन हमें ‘ऑपरेशन विजय’ की याद दिलाता है, जिसके तहत भारतीय सेना ने न्यूनतम रक्तपात के साथ पुर्तगाली सेना को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया था। गोवा की मुक्ति के लिए चले संघर्ष में स्थानीय वीरों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए सत्याग्रहियों ने भी लाठियां और गोलियां खाई थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि इन बलिदानों ने ही आज के आधुनिक और समृद्ध गोवा की नींव रखी है। वर्तमान में गोवा न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि विकास के विभिन्न मानकों पर भी यह राज्य देश का नेतृत्व कर रहा है, जो उन महान सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
आज जब भारत ‘अमृत काल’ में आगे बढ़ रहा है, गोवा मुक्ति दिवस हमें एकता और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि गोवा अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए नवाचार और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का मूल्य क्या है और इसे सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है। गोवा की मुक्ति की यह गाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करती रहेगी और भारत की अखंडता का प्रतीक बनी रहेगी।



