
शांत स्वभाव लेकिन सख्त कार्यशैली से बनाई अपनी अलग पहचान
मनस्वी वाणी, संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की राजनीति और विधान परिषद की कार्यशैली में अपनी अलग पहचान बना चुके सुरेन्द्र चौधरी आज जनप्रतिनिधियों के सम्मान, प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित के मुद्दों को लेकर मजबूत आवाज माने जाते हैं। शांत स्वभाव लेकिन सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले सुरेन्द्र चौधरी ने लगातार यह साबित किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति के सभापति के रूप में कार्य कर रहे सुरेन्द्र चौधरी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर देते हैं। उनका मानना है कि जनता की समस्याएं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ही शासन-प्रशासन तक पहुंचती हैं, इसलिए अधिकारियों का दायित्व है कि वे जनप्रतिनिधियों के पत्रों और सुझावों को गंभीरता से लें।
इसी सोच के तहत उन्होंने सभी विभागों को जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए पत्रों का अलग रजिस्टर तैयार करने और उस पर हुई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड दर्ज करने के निर्देश दिए। उनका यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरेन्द्र चौधरी की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि अनुशासनप्रिय और जनहित को सर्वोपरि रखने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में भी होती है। उनका स्पष्ट कहना है कि सरकारी बैठकों में लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वे अधिकारियों से लगातार यह अपेक्षा रखते हैं कि जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए और विकास योजनाओं की जानकारी जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित रूप से साझा की जाए।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सुरेन्द्र चौधरी की छवि एक ऐसे नेता की है, जो विकास कार्यों के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को भी बराबर महत्व देते हैं। उनकी कार्यशैली में सख्ती के साथ संवेदनशीलता भी दिखाई देती है, जिसके चलते वे प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहते हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का मानना है कि सुरेन्द्र चौधरी के नेतृत्व में समिति की सक्रियता से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है और जनहित से जुड़े मामलों में तेजी आई है। यही वजह है कि उनका नाम आज एक जिम्मेदार, सजग और जनहितैषी जनप्रतिनिधि के रूप में लिया जा रहा है।



